यूपी सरकार के प्रस्तावित विधेयक में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के लिए सरकारी नौकरी तथा अन्य लाभों को प्रतिबंधित करने तथा एक संतान वाले लोगों को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है।
नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा जनसंख्या नियंत्रण विधेयक को मुद्दा बनाना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार अभी जनसंख्या नियंत्रण के बारे में बात करने का सर्वोत्तम अवसर है। उनके अनुसार अभी इस मुद्दे पर बात करने के दो प्रभाव होंगे, पहला आम जनता बढ़ती जनसंख्या के खतरों के बारे में समझ चुकी है और काफी हद तक मानसिक रूप से तैयार भी है और दूसरा इससे यह भी अंदाजा हो जाएगा कि क्या वर्ष 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में इस विषय को चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि काफी समय से न केवल भाजपा वरन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लेकर कार्य करने की बात कहता रहा है। संभवतया यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तरप्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक 2021 के प्रावधानों को सार्वजनिक कर आम जनता से सुझाव मांगे हैं। यूपी सरकार के प्रस्तावित विधेयक में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के लिए सरकारी नौकरी तथा अन्य लाभों को प्रतिबंधित करने तथा एक संतान वाले लोगों को प्रोत्साहन देने की बात कही गई है। ऐसा ही एक बिल आसाम में भी लाया जा रहा है और धीरे-धीरे कई अन्य राज्य भी इस मुद्दे पर गंभीरता से सोच रहे हैं।
राज्यसभा में भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने प्रस्तुत किया निजी विधेयक
भाजपा के सांसद राकेश सिन्हा ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया है। उन्होंने बिल रखते हुए कहा कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक, सामाजिक और क्षेत्रीय संघर्षों का कारण बनती है। यदि हम अपने लोगों के लिए पर्याप्त संसाधन चाहते हैं तो हमें इस विषय में सोचना ही होगा। उन्होंने कहा कि सभी संसाधनों को नागरिकों के बीच समान रूप से वितरित किया जाना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचाना चाहिए।