
नई दिल्ली : जस्टिस रंजन गोगोई ने आज ही 3 अक्टूबर को मुख्य न्यायधीश पद की शपथ ली और कार्यभार संभाला है और पहले ही दिन उनके सख्त तेवर देखने को मिले। उन्होंने एक याचिका खारिज की तो अलग-अलग मामलों में कई अहम निर्देश भी दिए। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की चुनाव सुधार से संबंधित याचिका खारिज करते हुए उन्हें फटकार भी लगाई। एक और फैसले में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में जल्दी सुनवाई के लिए तभी आ सकते हैं, जब मामला बेहद आवश्यक और संगीन हो, जैसे किसी को फांसी पड़ने वाली हो, कोई मरने वाला हो या फिर डिमोलेशन करने जैसी कार्रवाई होने वाली हो। मुख्य न्यायधीश के सख्त रवैये को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने गौतम नवलखा मामले में जल्द सुनवाई की मांग करने का फैसला टाल दिया। इसी तरह जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 6 रोहिंग्या को डिपोर्ट करने का मामला उठाया तो उस पर उन्होंने कहा कि पहले याचिका दाखिल करें उसके बाद देखेंगे।
बीजेपी नेता की याचिका कर दी खारिज
एक याचिका डालकर भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय ने अदालत में मांग की थी कि एमएलसी को भी अपने खर्च की जानकारी देनी चाहिए। इस पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से अपने वकील को कुछ बताए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि खुद आप पेटिशनर इन पर्सन नहीं हैं, इसके बावजूद आप वकील को कैसे समझा सकते हैं। इसी आधार पर आपकी याचिका खारिज की जाती है। इस याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने मांग की थी कि केंद्र सरकार को चुनावी याचिकाओं के जल्द निपष्टाने, हाईकोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने या साल के भीतर पूरी करने के लिए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के निर्देश दिए जाएं।
जब तक अति आवश्यक न हो, नहीं होगी जल्द सुनवाई
बतौर मुख्य न्यायधीश पहले दिन उन्होंने मेशनिंग के लिए मना करते हुए कहा कि मेंशनिंग के लिए पहले पेटिशन फाइल करना आवश्यक होगा। सिर्फ बेहद आवश्क मैटर ही मेंशन किए जा सकेंगे। जब तक अति आवश्यक के पैरामीटर तय नहीं होते कोई भी मेंशनिंग नहीं होगी। जैसे कि कल किसी को मौत की सजा हो रही हो या जेल हो रही हो।
आज ही बने हैं 46वें मुख्य न्यायधीश
बता दें कि रंजन गोगोई ने आज ही भारत के मुख्य न्यायधीश पद की शपथ ली है। मंगलवार को जस्टिस दीपक मिश्रा का बतौर CJI कार्यकाल खत्म होने के बाद आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें मुख्य न्यायधीश पद की शपथ दिलाई है।