भारत Vaccine निर्माण को लेकर WHO से नियमित रूप से संपर्क में है। शोध कार्य और वैक्सीन के लिए DBT क्लियरेंस और फायनेंशियल सपोर्ट दे रहा है। दुनिया भर में 100 ज्यादा वैक्सीन पर शोध कार्य जारी है।
नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( coronavirus ) संकट से जंग जीतने के लिए दुनिया भर में वैक्सीन निर्माण पर तेजी से काम जारी है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हषवर्धन ( Health Minister Dr Harshvardhan ) ने कहा कि जल्दी से जल्दी वैक्सीन विकसित करने में भी कम से कम से एक साल लगता है। इसलिए वैक्सीन या इलाज मिलने तक लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क के साथ-साथ हैंड और फिजिकल हाइजीन का ध्यान रखना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में 14 वैक्सीन ( Vaccine ) का प्री-क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इनमें से चार वैक्सीन ऐसी हैं जो बहुत जल्द क्लिनिकल ट्रायल ( Clinical Trial ) की स्टेज में जा सकती हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अमरीकी कंपनियों के साथ मिलकर 3 तरह की कोविड-19 वैक्सींन डेवलप कर रही हैं। Zydus Cadila की दो वैक्सीन प्री-क्लिनिकल ट्रायल से गुजर रही हैं। Bharat Biotech भी शुरुआती टेस्टिंग के फेज में है। इन कंपनियों को उम्मीद है कि वह साल के आखिर तक वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर देगी। इसी तरह Indian Immunologicals Limited ने ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी से टाईअप किया है।
100 से ज्यादा वैक्सीन पर चल रहा काम
इसी तरह वैश्चिक स्तर पर 100 से भी ज्यादा वैक्सीन बनाने पर शोध जारी है। सभी से विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) कोऑर्डिनेट करता है। दुनियाभर में इस बात को लेकर प्रयास जारी है कि जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन ( Corona Vaccine ) तैयार हो जाए। ताकि लोगों को कोरोना से राहत मिल सके।
यूके में सेकेंड फेज में चल रहा है ट्रायल
ब्रिटेन में वैक्सीन का ट्रायल सेकेंड फेज में हैं। वहां इंसानों पर टेस्ट किए जा रहे हैं। चीन ने 108 वालंटियर्स पर टेस्ट किया था जो पूरा हो गया है। कुछ दवाओं के असर पर भी नजर रखी जा रही है। जैसे रेमडेसिवीर और फेविपिराविर आदि।
थाइलैंड का दावा
दूसरी तरफ थाइलैंड में भी कोरोना वायरस नियंत्रण के मकसद से वैक्सीन ट्रायल का काम अगले फेज में पहुंच गया है। यहां चूहों पर सफल टेस्ट के बाद बंदरों पर वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो चुका है। थाइलैंड ने दावा किया है कि 6 से 7 महीने में कोरोना की वैक्सीन तैयार हो सकती है।
DBT को मिली अहम जिम्मेदारी
कोरोना वैक्सीन जल्द से जल्द बनाने के साथ घरेलू कंपनियों के लिए रेगुलेटरी क्लियरेंस देने और गाइडलाइंस ( Guidelines ) तैयार करने का काम भी शुरू हो चुका है। भारत वैक्सीन का सॉलिडैरिटी ट्रायल शुरू करने के लिए WHO के टच में है। कोरोना की वैक्सीन, दवा और डायग्नोस्टिक को परखने की जिम्मेवारी DBT को सौंपी गई है। DBT ने 500 प्रस्तावों की समीक्षा के बाद कई कंपनियों को फंडिंग दी है।
DBT ने कोएलिशन फॉर वैक्सीन प्रीपेयर्डनेस इनोवेशंस ( CEPI ) और अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ( NIH ) से हाथ मिलाया है। रिसर्च वर्क में तेजी लाने के लिए DBT जल्द ही वैक्सीन डेवलपमेंट नोटिफिकेशन जारी करेगा।