अब तक आठ राज्यों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 1,276 लोगों की मौत हो गई। अकेले केरल में ही 443 लोगों की जान चली गई।
गृह मंत्रालय के नेशनल इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर (एनईआरसी) के मुताबिक केरल में 443 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 जिलों के 54 लाख 11 हजार लोग अब तक की सबसे भयावह बाढ़ और बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए। इसके चलते दक्षिण भारतीय राज्य के 47,727 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी फसल तबाह हो गई।
ऐसा ही नहीं है कि मानसून ने केवल केरल पर ही अपना कहर बरपाया। बल्कि उत्तर प्रदेश में इस मानसून में अब तक 218, पश्चिम बंगाल में 198, कर्नाटक में 166, महाराष्ट्र में 139, गुजरात में 52, असम में 49 और नगालैंड में 11 लोगों की जानें चली गईं। इसके अलावा कुल 37 व्यक्ति लापता हैं। इनमें केरल में 15, उत्तर प्रदेश में 14, पश्चिम बंगाल में 5 और कर्नाटक में 3 लोगों को अभी तक ढूंढ़ने का काम चल रहा है।
बारिश और इससे होनी वाली दिक्कतों के चलते देश भर में 349 लोग घायल भी हुए हैं। महाराष्ट्र में बारिश और बाढ़ ने 26 जिलों को शिकार बनाया है। जबकि असम और पश्चिम बंगाल के 23-23, उत्तर प्रदेश के 18, केरल के 14, कर्नाटक और नगालैंड के 11-11 और गुजरात के 10 जिले इससे प्रभावित हुए।
अकेले केरल में 14 लाख 52 हजार से ज्यादा लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि बाढ़ ने खेतों में खड़ी 43,727 हेक्टेयर फसल नष्ट कर दी है। असम में 11 लाख 47 हजार लोगों पर बाढ़-बारिश का कहर बरपा और 27,930 हेक्टेयर फसल चौपट हो गई।
पश्चिम बंगाल में 2 लाख 27 हजार लोगों पर पानी का प्रकोप फैला और 48,552 हेक्टेयर फसल नष्ट हो गई। उत्तर प्रदेश में 2 लाख 92 हजार हजार लोग मानसून से परेशान हुए और 49,053 हेक्टेयर में फैली फसल बर्बाद हो गई। कर्नाटक में बारिश-बाढ़ और भूस्खलन से पीड़ितों की संख्या 3.5 लाख रही और यहां पानी की वजह से 3,521 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई।