पत्नी ने याचिका में कहा था कि उसके पति और भाभी के बीच अवैध शारीरिक संबंध हैं। इसके बावजूद पति के प्रति उसका व्यवहार कठोर नहीं था।
नई दिल्ली। पति पर शक करके अवैध संबंधों का झूठा आरोप लगाने वाली महिलाओं को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ऐसी हरकत को क्रूरता करार दिया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है, जिसमें पति-पत्नी को अलग रखने का फैसला किया था। इसके साथ ही दंपती को तलाक की मंजूरी भी दे दी गई। तलाक की यह याचिका 2002 में दायर की गई थी।
ये हैं पत्नी के आरोप
पत्नी ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके पति और भाभी के बीच अवैध शारीरिक संबंध हैं। वह उसे धोखा दे रहा है। इसके बावजूद पति के प्रति उसका व्यवहार कठोर नहीं था। गौरतलब है कि यह जोड़ा 16 सालों से ये कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। अब जाकर उनका केस किसी नतीजे पर पहुंचा है।
पति ने लगाए ये आरोप
पति ने पत्नी पर शक करने और भाभी से अवैध संबंध रखने का बेबुनियाद आरोप लगाया था। इसके साथ ही उसने कहा कि पत्नी उसकी मांग का ख्याल नहीं रखती और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती है।
कोर्ट की टिप्पणी
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जीआर मिधा ने याचिकाकर्ता को तलाक की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने पत्नी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिवादी (पत्नी) ने याचिकाकर्ता (पति) के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया है। जैसा प्रतिवादी ने आरोप लगाया वैसा याचिकाकर्ता ने कभी नहीं किया। ऐसे में उन्हें तलाक की मंजूरी दी जाती है। क्रूरता के आधार पर तलाक का आदेश देते हुए दोनों की शादी को भंग की जाती है।