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गांधी जयंती 2018: हत्या के 10 दिन पहले भी महात्‍मा गांधी के ऊपर फेंका गया था बम

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में पैदा होने वाले मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है।
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Oct 02, 2018
 Mahatma Gandhi
गांधी जयंती: हत्या के 10 दिन पहले भी महात्‍मा गांधी के ऊपर फेंका गया था बम

नई दिल्ली। पूरा देश आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में पैदा होने वाले मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। दरअसल, कम ही लोगों को पता है कि गांधीजी को महात्मा की उपाधि किसी और नहीं, बल्कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी। महात्मा गांधी आजीवन अहिंसा और सत्य को अपना हथियार बनाकर आगे बढ़ते रहे। भारत को गुलामी बेड़ियों से छुड़ाने के लिए गांधीजी ने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े अभियानों का सफल नेतृत्व किया था। इसी का परिणाम है कि अंग्रेजों के साथ ही पूरे विश्व ने गांधीजी के अहिंसात्मक आंदोलनों का लोहा माना।

यहां हैरान करने वाली बात यह है कि प्रत्येक परिस्थिति में अहिंसा का साथ न छोड़ने वाले महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने भारत ही नहीं समूची दुनिया को भारी आघात लगा। नाथूराम गोडसे नाम के शख्स ने केवल वैचारिक मतदभेद के चलते गांधीजी को एक के बाद एक तीन गोलियां मारी। लेकिन आपको बता दें कि यह इससे पहले भी महात्मा गांधी की हत्या का प्रयास किया जा चुका था। दरअसल, महात्मा गांधी नहीं चाहते थे कि उनसे मिलने आने वाले लोगों की कोई तलाशी या जांच की जाए। यही कारण है कि उन्होंने सरकारी से मिलने वाली सुरक्षा लेने से साफ इनकार कर दिया था। गांधीजी की मौत 10 दिन पहले भी उनकी हत्या का प्रयास किया गया था। बापू नजदीकि रहीं मनुबेन की पुस्तक अंतिम झांकी के अनुसार 20 जनवरी 1948 की शाम बापू की प्रार्थना के बाद प्रवचन के समय अचानक एक बड़ा धमाका हुआ और भगदड़ मच गई। लेेखिका खुद इस घटना से काफी घबरा गई थी और उन्होंने बापू के पैर पकड़ लिए थे। हालांकि गांधीजी के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं आई थी और उन्होंने प्रवचन जारी रखा।

पुस्तक में आगे लिखा है कि बाद में पता चला कि यह महात्मा गांधी को मारने एक का षडयंत्र था। इस घटना को अंजाम देने के कलिए प्रार्थना के दौरान ही मदनलाल नाम के एक शख्स ने यह बम फेंका था। घटना को अंजाम देने के बाद भागते समय मदनलाल को प्रार्थना में शामिल पंजाबी महिला ने पकड़ लिया था। जांच के दौरान सामने आया कि हमलावर को महात्मा गांधी को सुलह-शांति पसंद नहीं थी। यही वजह थाी कि उसने गांधीजी की हत्या करने का प्रयास किया। हालांकि घटना के अगले दिन से गांधीजी की सुरक्षा के लिए बिड़ला भवन में सेना के जवानों की व्यवस्था की गई और यह तय किया गया कि प्रार्थना में शामिल होने वाले लोगों की तलाशी ली जाएगी। बावजूद इसके गांधीजी नहीं माने और लोगों की तलाशी वाली बात से इनकार कर दिया।

Published on:
02 Oct 2018 08:30 am