मनाली इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है क्योंकि आसपास के पहाडों की चोटियों पर बर्फ जमा है।
चंडीगढ। वर्ष 2017 को अलविदा कहते हुए नए साल के सुरूर में डूबने के लिए हजारों सैलानी शनिवार तक हिमाचल प्रदेश के रिसाॅर्ट में अपना डेरा डाल चुके थे। अगले सप्ताह तक इन सैलानियों का अभिवादन मंद सूरज द्वारा किया जाएगा। इस दौरान हिमपात के आसार नहीं है। सैलानियों के पसंदीदा स्थान शिमला, कुफ्री, नारकंडा, कसौली , चैल , धर्मशाला, पालमपुर, डलहौजी व मनाली है। सैलानियों ने अगर होटलों में बुकिंग पहले से नहीं करवाई है तो उन्हें अपनी कार में ही रात गुजारनी पड सकती है। ज्यादातर होटल पहले ही बुक कराए जा चुके है।
सैलानियों की अच्छी आमद
हिमाचल प्रदेश पर्यटक विकास निगम के महाप्रबन्धक विजय शर्मा के अनुसार सैलानियों की आमद अच्छी है। ज्यादातर सैलानी नए साल की पूर्व संध्या पर हिमपात की संभावना के बारे में पूछताछ कर रहे है। पर्यटन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल की अगवानी के लिए 50 हजार सैलानियों के पहुंचने की उम्मीद है। शिमला से करीब 65 किलोमीटर दूर लोकप्रिय पर्यटक स्थल नारकंडा में इस माह हिमपात हुआ था लेकिन वह जल्दी ही पिघल गया। ब्रिटिशकालीन इमारतों के शाही वैभव के लिए मशहूर शिमला को तो अभी तक हिमपात का इंतजार है। शिमला के मौसम विभाग कार्यालय के अनुसार राज्य में चार जनवरी तक मौसम शुष्क ही रहने की संभावना है। सभी प्रमुख पर्वतीय स्थलों पर पिछले एक पखवाडे से हिमपात नहीं हुआ। शिमला के ऐतिहासिक रिज, धर्मशाला व पालमपुर से दिखाई देने वाली पहाडों की चोटियां हिम आच्छादित है। मनाली इन दिनों सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है क्योंकि आसपास के पहाडों की चोटियों पर बर्फ जमा है। हिमाचल प्रदेश में सुदूर स्थलों पर पर्यटक विश्रामगृृह नहीं है। ग्रामीण घरेलू आश्रयस्थल वर्ष 2008 से शुरू हुए है। सैलानी इसलिए सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी पहुंच रहे है। प्रदेश में 807 घरेलू आश्रयस्थल पंजीकृत है। इनमें से 233 कुल्लू-मनाली क्षेत्र में है। शिमला जिले में 211 व कांगडा जिले में 111 है। जल विद्युत व बागवानी के बाद हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर
निर्भर करती है।