
नई दिल्ली। एक ओर जहां गलवान घाटी ( Galwan Valley ) में चीन ( China ) के साथ हमारा मोर्चा खुला हुआ है, वहीं भारत-नेपाल ( India-Nepal Tension ) के बीच सीमा विवाद को लेकर चल रही तनातनी का असर अब बिहार ( Bihar ) पर पड़ने लगा है। पिछले दिनों बिहार के सीतामढ़ी ( Sitamarhi ) में हुई गोलीबारी की गूंज अभी कम नहीं हुई थी कि नेपाल ने एक बार फिर हिमाकत दिखानी शुरू कर दी है। इस बार नेपाल नदियों के बैराजों पर चल रहे मरम्मत कार्यों में बाधा डाल रहा है। यही वजह है कि बिहार के एक बड़े हिस्से पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इस गतिरोध को शांत करने के लिए बिहार सरकार ( Bihar Government ) ने विदेश मंत्रालय ( Foreign Ministry ) को पत्र भी लिखने की बात कही है।
बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा के अनुसार यह विवाद गंडक नदी पर बने बैराज को लेकर है। झा ने कहा कि इस बैराज के 36 द्वार हैं, जिनमें से 18 नेपाल में हैं। भारत अपने हिस्सो में पड़ने वाले फाटक व बांधी की सफाई और मरम्मत का काम करा चुका है। जबकि नेपाल में आ रहे बांधों का मरम्मत का कार्य अभी शेष है। उन्होंने कहा कि अब जबकि शेष कार्य को पूरा किया जाना है तो नेपाल बांध मरम्मत के लिए सामग्री ले जाने पर रोक लगा रहा है।
जल संसाधन मंत्री ने कहा कि नेपाल ने न केवल तटबंध के काम पर रोक लगा दी है, बल्कि वह गंडक बांध के लिए मरम्मत कार्य की इजाजत भी नहीं दे रहा है। संजय झा ने कहा कि ऐसा पहली बार है, जब नेपाल की ओर से हमारी आवाजाही और मरम्मत कार्य के लिए सामग्री पहुंचाने पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही नेपाल के हिस्से वाले बांधों का मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं किया गया तो बिहार का एक बड़ा भाग बाढ़ की भेंट चढ़ सकता है।
हालांकि फिलहाल बिहार के स्थानीय इंजीनियर और जिलाधिकारी इस मसले पर नेपाल के अधिकारियों से वार्ता कर रहे हैं। लेकिन समस्या के त्वरित समाधान के लिए वह अब विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखेंगे।