अमरीका ने भारत के साथ दुनिया भर के देशों को चार नवंबर तक ईरान से तेल न खरीदने की चेतावनी दी है।
नई दिल्ली। अमरीका ने भारत के साथ दुनिया भर के देशों को चार नवंबर तक ईरान से तेल न खरीदने की चेतावनी दी है। उसने कहा कि अगर भारत ईरान से तेल खरीदता है तो उसे भी आर्थिक प्रतिबंधों की मार झेलनी पड़ सकती है। दरअसल उसका मकदस ईरान को आर्थिक मोर्चे पर अगल—थलग करना तो है ही, इसके साथ तेल का नया बाजार भी बनाना है। मगर भारत पर इस चेतावनी का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा ईरान से ही खरीदता है।
तेल का भंडार बढ़ाएगा भारत
हालांकि इसके उपाय स्वरूप भारत ने अपने तेल भंडारण को बढ़ाने का उपाय कर रहा है। देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने आपात स्थिति का सामना करने के लिए अपनी भंडारण क्षमता में वृद्धि करने का फैसला किया है। इसके तहत 65 लाख टन की अतिरिक्त भंडारण व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कर्नाटक के पदुर और ओडिशा के चांदीखोल में अतिरिक्त आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने संबंधी एक प्रस्ताव को मंजूरी दी।
22 दिन की जरूरत का तेल होगा जमा
यह भंडारण व्यवस्था बनने के बाद आपात स्थिति होने पर 22 दिन तक देश की पेट्रोलियम की जरूरत पूरी हो सकेगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कैबिनेट फैसलों जानकारी देते हुए कहा कि चांदीखोल में 40 लाख टन और पदुर में 25 लाख टन के लिए भूमिगत भंडारण होगा।
तेल की घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा खरीदता है भारत
गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का तीन चौथाई से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में लंबे समय से सरकार की कोशिश रही है कि देश में आपात स्थिति के लिए पेट्रोलियम भंडारण किया जाए। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आइएसपीआरएल) अब तक तीन जगहों विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन, मैंगलोर में 15 लाख टन और पदुर में 25 लाख टन के भंडार बनाया है । इस तरह कुल 53.3 लाख टन कच्चे तेल के भंडारण की भूमिगत व्यवस्था का निर्माण हो चुका है। इससे भारत की करीब 10 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। जबकि 65 लाख टन की प्रस्तावित भंडारण क्षमता से करीब 12 दिनों के लिए अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।