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Indian Railway: भारतीय रेलवे का एक और कारनामा, Lockdown के एक महीने में तैयार किया नायाब इंजन

Indian Railways का Corona संकट के बीच एक और बड़ा कारनामा Lockdown के एक महीने में तैयार किया बैटरी से चलने वाला इंजन उत्तर रेलवे का पहला ऐसा इंजन जो 15 किमी की रफ्तार से करेगा शंटिंग
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Updated: 20 Aug 2020, 10:41 AM IST
Indian Railways
भारतीय रेलवे ने तैयार किया बैटरी इंजन

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस ( Coronavirus in india ) लगातार अपने पैर पसार रहा है। हालांकि कोरोना के इस बढ़ते संकट के बीच केंद्र ( Central Govt ) और राज्य सरकार लगातार जरूरी कदम उठा रही है ताकि इसके फैलाव को रोका जा सके। वहीं भारतीय रेलवे ( Indian Railway ) भी लगातार संकट की इस घड़ी में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। फिर वो चाहे ट्रेनों ( Train ) के समय पर चलाना हो, ज्यादा से ज्यादा सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना हो या फिर रेलवे की गुणवत्ता में सुधार। भारती रेलवे की ओर से लगातार काम किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में भारतीय रेलवे का एक और बड़ा कारनामा सामने आया है। दरअसल कोरोना महामारी के दौरान उत्तर रेलवे की तरफ से फिरोजपुर मंडल के अधीन लुधियाना में बैटरी के साथ चलने वाला लोकोमोटिव इंजन बना कर तैयार कर दिया गया है। खास बात यह है कि इसको आत्म निर्भरता की बड़ी मिसाल बताया जा रहा है। लॉकडाउन के सिर्फ एक महीने में रेलवे ने ये खास इंजन तैयार किया है।

पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर लगातार काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे भी पीछे नहीं है। कोरोना महामारी में लॉकाडउन के एक महीने के दौरान उत्तर रेलवे की तरफ से फिरोजपुर मंडल के अधीन लुधियाना में बैटरी के साथ चलने वाला लोकोमोटिव इंजन बना कर तैयार किया है।

इस इंजन की खासियत यह है कि यह 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के साथ शंटिंग का काम करेगा। लुधियाना रेलवे के आशीष वर्मा और मोहन स्वरूप सीनियर इंजीनियर इलेक्ट्रिक ने बताया कि इस इंजन को लॉकडाउन के दौरान 1 महीने के समय में तैयार किया गया है।

अधिकारियों की मानें तो इस इंजन को तैयार करने के लिए 6 सदस्यों की विशेष टीम बनाई गई थी, जिन्होंने एक महीना दिन-रात मेहनत करने के बाद इसको तैयार किया है।

दरअसल मंडल की ओर से वर्ष 1975 में तैयार किए गए इंजन के मॉडल को अपग्रेड किया गया है। उत्तर भारत का पहला ऐसा इंजन तैयार किया गया है जो 15 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के साथ शंटिंग का काम करेगा।
फिलहाल इस इंजन को केवल अंदरूनी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में रेलवे इस सैक्टर में आगे बढ़ेगा और फिर यात्रियों वाले इंजन की भी बैटरियों के साथ चला करेंगे।

Updated on:
20 Aug 2020, 10:41 AM IST
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