Highlights. - दिल्ली में पले-बढ़े और अमरीका की मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) से ग्रेजुएट अर्नव कपूर ने नया गैजेट ‘अल्टर ईगो’ बनाया है - ‘अल्टर ईगो’ या एआइ- माइंड-रीडिंग हेडसेट को टाइम 2020 के 100 सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में नामित किया गया है - जिन्हें बात करने में दिक्कत होती है, उनके लिए डिवाइस वरदान है

नई दिल्ली।
जहां चाह है वहां राह है, दिक्कत आने पर तकनीक आपकी मदद करेगी। जी हां, तेजी से बदलते इस दौर में विज्ञान की मदद से सब कुछ संभव है। इसी सोच के साथ दिल्ली में पले-बढ़े और अमरीका की मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) से ग्रेजुएट अर्नव कपूर ने नया गैजेट ‘अल्टर ईगो’ बनाया है। इसे हैडफोन की तरह पहना जाता है।
संकेतों को पढ़ेगी मशीन
दिमाग के संकेतों को पढक़र मशीन विचार व्यक्त करने में मदद करेगी। ‘अल्टर ईगो’ या एआइ- माइंड-रीडिंग हेडसेट को टाइम 2020 के 100 सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में नामित किया गया है।
बोलने में अक्षम लोगों के लिए वरदान
जिन्हें बात करने में दिक्कत होती है, उनके लिए डिवाइस वरदान है। एमियोट्रोफिक लेटरल स्केलेरोसिस (एएलएस) या मल्टीपल स्लेरोसिस जैसी बीमारियों से पीडि़तों को ध्यान में रखकर इसे डिजाइन किया गया है। ऐसे मरीजों के दिमाग को तंत्रिका तंत्र से संपर्क करने या संकेत देने में दिक्कत होती है, जिससे वे बोल नहीं पाते हैं।