करीब दो माह पहले जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सेना के जवान औरंजगेब की आतंकियों ने हत्या कर दी थी लेकिन अब उसके 50 दोस्तों ने मौत का बदला लेने की कसम खाई है।
जम्मू। यह कहानी कुछ फिल्मी सी लग सकती है, लेकिन है हकीकत। बीते दिनों कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों द्वारा सेना के जवान औरंगजेब की हत्या कर दी गई थी। हत्या से पहले आतंकियों ने औरंगजेब का वीडियो भी बनाया था। रिटायर्ड सैनिक औरंगजेब के पिता ने इसके बाद अपने बेटे की हत्या का बदला लेने की घोषणा की थी। लेकिन अब औरंजगेब की शहादत का बदला लेने के लिए उसके 50 दोस्त इकट्ठा हो गए हैं जो विदेशों में अपनी बढ़िया नौकरी छोड़कर वापस लौटे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना के जवान औरंगजेब की आतंकियों द्वारा हत्या किए जाने के तकरीबन दो माह बाद खाड़ी मुल्कों में काम करने वाले उसके 50 दोस्त वापस आ गए हैं। यह सभी दोस्त औरंगजेब के गांव सलानी में इकट्ठा हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि सभी का मकसद एक ही है और वो है अपने दोस्त औरंगजेब की मौत का बदला। हालांकि बदला लेने के लिए उन्होंने गैर-कानूनी नहीं बल्कि वैध तरीका एख्तियार करने का मन बनाया है।
सभी दोस्तों ने इसके लिए सेना और पुलिस में भर्ती होकर आतंकवादियों के सफाये का प्लान बनाया। सऊदी अरब से नौकरी छोड़कर आए मोहम्मद किरामत के मुताबिक उन्हें जैसे ही औरंगजेब की हत्या के बारे में पता चला, उन लोगों ने उसी दिन सऊदी अरब से अलविदा कह दिया। वहां नौकरी छोड़ना आसान नहीं होता लेकिन किसी तरह उन्होंने यह सब मैनेज किया और जबरदस्ती जॉब छोड़ दी। उनके साथ गांव के 50 युवक भी वापस आए हैं। सभी का अब एक ही मकसद है कि वो औरंगजेब की मौत का बदला लें।
एक अन्य साथी मोहम्मद किरामत की मानें तो सऊदी अरब में किसी को भी यूं ही अचानक नौकरी छोड़ देने की छूट नहीं है। हालांकि इन लोगों ने किसी तरह इसे मैनेज कर लिया।
वहीं, सेना में ही नौकरी करने वाले औरंगजेब के भाई मोहम्मद कासिम का कहना है कि भाई की मौत के लिए आतंकवादी नहीं बल्कि वो लोग जिम्मेदार हैं जो आतंकी संगठनों को यह करने का आदेश देते हैैं। आलम यह है कि सेना की चेतावनी और कार्रवाई के बावजूद भी आतंकवादी बेखौफ हैं। वहीं, औरंगजेब के पिता ने भी अपने बेटे की मौत का बदला लेने की चेतावनी दी थी।
गौरतलब है कि बीते 14 जून को ईद की छुट्टी लेकर घर जा रहे औरंगजेब का आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद आतंकियों ने औरंगजेब की हत्या कर दी थी। पुलवामा में उसी रात औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ था। इतना ही नहीं आतंकवादियों ने हत्या से पहले औरंगजेब का एक वीडियो भी बनाया था। जब पुंछ में औरंगजेब को सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा था तो उसे आखिरी सलाम देने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ आई थी। इस घटना से चार वर्ष पूर्व औरंगजेब के चाचा की हत्या भी आतंकियों ने अपहरण करने के बाद कर दी थी।
ऐसा नहीं है कि औरंगजेब की हत्या के बाद से ऐसे हालात थम गए। इससके बाद जम्मू-कश्मीर में दो पुलिसवालों के साथ ही एक सीआरपीएफ जवान की हत्या की जा चुकी है। बीते 29 जुलाई को ही सीआरपीएफ जवान नसीर रादर की हत्या कर दी गई।