शुक्रवार (28 सितंबर) को कोर्ट केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी।
नई दिल्ली। समाज में महिलाओं के समान अधिकार दिलाने को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। अब शुक्रवार (28 सितंबर) को कोर्ट केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी। बता दें कि मौजूदा समय में 10 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है।
लैंगिक आधार पर भेदभाव है यह नियमः IYLA
आपको बता दें कि इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्य ने केरल में प्रचलित इस प्रथा को देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है। अपनी याचिका में IYLA ने कहा है कि यह प्रथा लैंगिक आधार पर भेदभाव करती है, लिहाजा इस खत्म करना किया जाना चाहिए। इसके अलावा याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह संवैधानिक समानता के अधिकार में भेदभाव है। एसोसिएशन ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 41 दिन से ब्रहचर्य की शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि महिलाओं के लिए यह असंभव है।
SC ने फैसले के बाद सुरक्षित रख लिया था
आपको बता दें कि बीते महीने एक अगस्त को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था। इधर केरल सरकार ने भी मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश की वकालत की है। दूसरी तरफ याचिका का विरोध करने वालों ने कोर्ट में दलील दी है कि सैकड़ों साल पुरानी प्रथा और रीति रिवाज है, जिसमें कोई भी दखल नहीं दे सकता है। विरोध करने वालों का कहना है कि भगवान अयप्पा खुद ब्रहमचारी हैं और वे महिलाओं का प्रवेश नहीं चाहते। बता दें कि इससे पहले महाराष्ट्र के नासिक में शनि सिगना मंदिर में वर्षों बाद महिलाओं को प्रवेश कि इजाजत मिली थी।