
पेरिस। अब तक एक किलोग्राम की जो परिभाषा बताई जाती थी, वो बदल गई है। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि एक किलोग्राम वजन में तनिक भी बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि फिर इसकी परिभाषा बदलने की क्या जरूरत थी। तो परेशान होने की जरूरत नहीं हम आपको बताते हैं। साथ ही यह भी जान लीजिए कि नई परिभाषा कैसे तय की गई है।
दरअसल वर्ष 1889 में दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने यह तय किया था कि एक किलोग्राम की परिभाषा क्या होगी। अब 129 वर्ष बाद इस परिभाषा में बदलाव किया गया है। इसकी वजह यह है कि अब तक जिस मिश्र धातु के बेलन से एक किलोग्राम द्रव्य का मानक तय किया गया था उसमें इन 129 वर्षों में 50 माइक्रोग्राम की कमी आ चुकी है। यह एक अरब के 50वें हिस्से के बराबर है।
अब नई पद्धति में मानक तय करने के लिए धातु के बजाय विद्युत धारा (इलेक्ट्रिक करेंट) को आधार बनाया गया है। इस तकनीक से धातुओं के द्रव्यमान में आने वाली प्राकृतिक कमी से होने वाली गड़बड़ी से बचा जा सकेगा। शुक्रवार को फ्रांस के वरसेलीज शहर में 60 देशों के वैज्ञानिकों ने मतदान के बाद यह निर्णय लिया। इसका निर्णय जनरल कॉन्फ्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स में किया गया। इससे नैनोटेक्नोलॉजी, दवाओं के विकास, इंजीनियरिंग में नए मापन से ज्यादा सटीकता और शुद्घता हासिल की जा सकेगी।
अब तक धातु का था बेलन
अब तक फ्रांस के सेव्रेज शहर में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स की प्रयोगशाला में प्लेटिनम और इरीडियम की एक मिश्र धातु के ठोस बेलन (सिलेंडर) के द्रव्यमान को एक किलोग्राम कहा जाता है। यही एक किलोग्राम की परिभाषा भी थी।
इस बेलन की कुछ प्रतिकृतियां बनाकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रखी गईं। रेडियो विकिरण के कारण धातु के द्रव्यमान में कमी आती है। बेलन के भार में अब तक 50 माइक्रोग्राम तक की कमी आ चुकी है।
ऐसे तय हुई नई परिभाषा
बीते पांच वर्ष की मेहनत से वैज्ञानिकों ने तराजू जैसा एक उपकरण बनाया। किब्बल तराजू के एक तरफ भार (द्रव्य) होता है और दूसरी ओर उसे खींचने वाली एक टन की विद्युत चुंबक है। इस चुंबक में विद्युत धारा प्रवाहित कर दूसरी ओर लटके भार को संतुलित किया जाता है।
नई परिभाषा के अनुसार विद्युत धारा की एक निश्चित मात्रा इस चुंबक में बहाने पर यह उपकरण जितने भार को संतुलित करेगा वह एक किलोग्राम होगा। यह उपकरण निर्वात वाले चैंबर में बंद रहता है। उपकरण का विकास डॉ. ब्रायन किब्बल ने किया था।
एंपियर, केल्विन और मोल की भी परिभाषा नई
कॉन्फ्रेंस में विद्युत धारा की इकाई एंपियर, तापमान मापने की इकाई केल्विन व विशिष्ट पदार्थों में कणों की संख्या मापने की इकाई मोल की भी परिभाषा भी बदली गई।