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खाद्य सामग्रियों के पैकेट पर प्रति किलोग्राम दर या प्रति लीटर दर अंकित करने की मांग

प्रनिधिमंडल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में तेजी से तरक्की करती दुनिया में विभिन्न पैकेजिंग और विशेष गुणों के साथ बाजार में कई उपभोक्ता सामान उपलब्ध हैं, इससे उपभोक्ता के लिए निर्णय लेना जटिल हो रहा है...
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चित्र में बाएं से दाएं: आकाशवाणी  के राजेश राजपुरोहित, इंडियाप्रेस व मुंबादेवी कन्जुमर वेलफेयर एसोसिएशन के जगदीश पुरोहित, सी.आर.चौधरी, पुखराज दूदू और श्रवण चौधरी, प्रतिनिधि मंडल सदस्य

चित्र में बाएं से दाएं: आकाशवाणी के राजेश राजपुरोहित, इंडियाप्रेस व मुंबादेवी कन्जुमर वेलफेयर एसोसिएशन के जगदीश पुरोहित, सी.आर.चौधरी, पुखराज दूदू और श्रवण चौधरी, प्रतिनिधि मंडल सदस्य

(मुंबई): मुंबादेवी कन्जुमर वेलफेयर एसोसिएशन और इंडियाप्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने जगदीश पुरोहित के नेतृत्व में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्‍यमंत्री सी.आर.चौधरी,से मुलाकात करके खाद्य पदार्थों के पैकेट पर उसमें रखी गई खाद्य सामग्री का प्रति किलोग्राम दर या प्रति लीटर दर अंकित करने की मांग की।

प्रनिधिमंडल ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में तेजी से तरक्की करती दुनिया में विभिन्न पैकेजिंग और विशेष गुणों के साथ बाजार में कई उपभोक्ता सामान उपलब्ध हैं, इससे उपभोक्ता के लिए निर्णय लेना जटिल हो रहा है । दरअसल, बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए, विनिर्माण कंपनियां ऐसे उत्पादों की पेशकश कर रही हैं । इन उत्पादों के विनिर्माता घोषित करते हैं कि उनका उत्पाद "वजन और माप (पैक्ड कमोडिटीज) अधिनियम, 1977 के मानक 'या' वजन और माप (पैक्ड कमोडिटीज) अधिनियम, 1977 के मानक के तहत गैरमानक आकार (नॉट ए स्टैंडर्ड साइज) का है ।"

ज्ञापन के मुताबिक विक्रेता इस नियम का दुरुपयोग करते हैं और अधिकतर पैकेजिंग हवा या गैस के साथ करते हैं, ताकि खरीदारों को झूठा विश्वास हो सके कि उनके पैक में अधिक सामग्री है, और वे खरीदारों को यह भी विश्वास दिलाते हैं कि उनका उत्पाद प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक किफायती मूल्य का है । लेकिन घोषणा के चलते अनुपालन एजेंसिया कुछ नहीं कर सकती हैं, क्योंकि विक्रेता कानून का पालन करते हैं ।

ज्ञापन में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया हैं कि वह इस अनुचित कारोबार पर अंकुश लगाने और विक्रेताओं को उत्पाद के प्रकार के अनुसार पैकेट पर "प्रति किलोग्राम दर" या "प्रति लीटर दर" साफ-साफ अंकित करना सुनिश्चित करें । इससे आम आदमी इस बात से वाकिफ होगा कि खरीदे गए उत्पाद का उसकी मात्रा आकार के अनुसार सही भुगतान कर रहा है या नहीं? इससे उन्हें किसका उत्पाद खरीदें किसका नहीं यह निर्णय लेने में आसानी होगी ।

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