
नई दिल्ली.
कोविड-19 महामारी के वर्ष 2020 में तनाव, अवसाद, नकारात्मकता, बेचैनी और अनिद्रा यानी इनसोम्निया जैसी बीमारियों की लिस्ट में अनिद्रा टॉप पर रहा। अमरीका, चीन और यूरोप में इसका असर सबसे ज्यादा है। भारत में भी नेशनल सेंटर ऑफ बायो टेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (एनसीबीआइ) के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 15 प्रतिशत से ज्यादा लोग अनिद्रा के शिकार हैं। अमरीकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसन (एएएसएम) के मुताबिक अमरीका में तो करीब ८५ प्रतिशत युवा अनिद्रा से ग्रसित हैं।
सात घंटे सोना जरूरी
एएएसएम की रिपोर्ट के मुताबिक सात घंटे की नींद हर किसी के लिए आवश्यक है। अपर्याप्त नींद लोगों में हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों को बढ़ा रही है। वहीं, पर्याप्त नींद से लोग तंदुरुस्त, प्रसन्न और कार्यशील होते हैं।
यह हैं अनिद्रा के कारण
एएएसएम के मुताबिक करीब ६० प्रतिशत लोग सोने के समय के बाद शराब के सेवन से अनिद्रा का शिकार बनते हैं। वहीं, 88 फीसदी लोग देर रात तक स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर आदि) देखने के कारण अनिद्रा से घिरते जा रहे हैं। करीब २२ फीसदी लोग महामारी के कारण नींद खो चुके हैं।
कोरोना भी कारण
कोरोना से ठीक होने के बाद भी करीब 30 फीसदी लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरो का कहना है कि भविष्य में दोबारा संक्रमित होने की चिंता, मानसिक तौर पर थकावट, तनाव, शरीर में पहले जैसी ऊर्जा का न बचना जैसे कारणों से लोगों को ऐसी परेशानियां आ रही हैं।
यह अपनाएं उपाय
- सोने के समय शराब का सेवन न करें
- लंच टाइम के बाद कैफीन और सोते समय मीठा खाने से बचें
- सोने से लगभग एक घंटे पहले गैजेट बंद कर दें
- सोने से पूर्व शांत वातावरण बनाएं
- सोने का कमरा शांत, प्रकाशरहित व अनुकूल तापमान पर हो
- योग और प्राणायाम करें