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Coronavirus: लॉकडाउन की घोषणा तो कर दी, लेकिन जरूरी सेवाओं के वादे कैसे पूरे करेंगे साहब

सरकार ने नागरिकों से किया है डोरस्टेप डिलीवरी का वादा। जरूरी सामान लोगों तक हर हाल में पहुंचाने का किया दावा। लेकिन सप्लाई चेन सिस्टम में मौजूद चुनौतियां भी कम नहीं।

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कोरोना वायरस के बीच खरीदारी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के तेजी से प्रसार को रोकने के लिए भारत 21 दिनों के ऐतिहासिक लॉकडाउन पर आ चुका है। केंद्र और राज्य सरकारों ने इसे लेकर परेशान नागरिकों से कहा है कि उनकी किराने और दवा की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने भी डोरस्टेप डिलीवरी का वादा किया है। लेकिन चेतावनी के संकेत पहले ही देखे जा सकते हैं और कई चुनौतियां हैं जिनसे निपटना बाकी है।

कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स के सर्वेक्षण में 20-22 मार्च से 23-24 मार्च तक ई-कॉमर्स सेवाओं के माध्यम से आवश्यक सामान खरीदने में नाकाम ग्राहकों का प्रतिशत 35 से 79 फीसदी तक दिखाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल स्टोर पर यह दर 17 से बढ़कर 32 फीसदी हो गई।

भारतीय रेलवे की चुनौती

भारतीय रेलवे, जिसका कार्गो संचालन पूरे लॉकडाउन में काम करेंगा, ने कैबिनेट सचिव को सूचित किया है कि उसके कर्मचारियों को ड्यूटी पर रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है। फ्रेट ऑपरेटर्स पर कृषि-राज्यों में पैदा अनाज को ले जाने का भार पड़ रहा है।

इन लॉजिस्टिक में रोजगार का प्रमाण साथ रखने वाले रेलवे कर्मचारी तो शामिल हैं, लेकिन वो दैनिक मजदूर भी हैं जो ट्रकों में माल चढ़ाते-उतारते हैं, और फिर माल को प्लेटफॉर्म पर ले जाते हैं।

ट्रकों की परेशानी

फिर ट्रकों का भी मामला है। आवश्यक सामानों को ले जाने वाले वाणिज्यिक वाहनों को लॉकडाउन से छूट दी गई है। लेकिन ऑनलाइन और ऑफलाइन सुपरमार्केट और लॉजिस्टिक कंपनियों के मुताबिक ट्रकों को रोका जा रहा है।

इसके अलावा एक और चुनौती भी है। भारत के हाईवे ट्रकों के लिए सिर्फ एक रास्ता ही नहीं हैं बल्कि इससे ज्यादा हैं। ये हाईवे एक सेवा अर्थव्यवस्था हैं, जिनमें सड़क किनारे चाय विक्रेता, ढाबे, लॉज, गैराज भी शामिल हैं। इन्हें लॉकडाउन से छूट नहीं है। इसलिए, अगर ट्रक वाले सामान को लादकर ले जाते हैं, तो उन्हें यह काम बिना भोजन या आराम के करना पड़ सकता है।

राज्यों की भूमिका

क्या राज्य इसमें भूमिका निभा सकते हैं? भारत के सार्वजनिक वितरण प्रणाली का ट्रैक रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से बेहतरीन नहीं है। निश्चित रूप से, भारत ने इस प्रणाली में भ्रष्टाचार को कम कर दिया है, लेकिन यह फिर भी बनी हुई है- 2012 में यह 42 फीसदी थी।

उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में, आदिवासियों को राशन की आपूर्ति में भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं। भारत ने ऐसी ऐतिहासिक चुनौतियों से निपटने के लिए आधार को लागू तो किया है, लेकिन वायरस के फैलाव ने इसे राशन की दुकानों पर बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण को निलंबित करने के लिए मजबूर कर दिया है।

Updated on:
25 Mar 2020 09:18 pm
Published on:
25 Mar 2020 08:15 pm
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