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पद्म पुरस्कारों के लिए चयन समिति की बढ़ गईं मुश्किलें, अबतक 21 हजार नामांकन दाखिल

देश का कोई भी नागरिक किसी भी हस्ती को या स्वयं को पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकित कर सकता है।

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Aug 28, 2018
पद्म पुरस्कारों के लिए चयन समीति की बढ़ गईं मुश्किलें, अबतक 21 हजार नामांकन दाखिल

नई दिल्ली। पद्म पुरस्कारों के लिए इस साल आवेदनकर्ताओं की होड़ मची हुई है। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और विशिष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों के लिए सरकार को अबतक 21 हजार से अधिक नामांकन मिले हैं। इसकी वजह से चयन समीति की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार इन पुरस्कारों के लिए नामांकन भेजने की प्रक्रिया पिछेल एक मई को शुरू हुई थी और इसकी अंतिम तिथि 15 सितम्बर है।

21 हजार से अधिक नामांकन

पद्म पुरस्कारों की वेबसाइट पर अब तक 21 हजार 855 पंजीकरण किए जा चुके हैं। पद्म पुरस्कारों के लिए केन्द्रीय मंत्रालयों/ विभागों , राज्यों सरकारों , भारत रत्न तथा पद्म विभूषण से सम्मानित हस्तियों , उत्कृष्टता प्रतिष्ठानों और अन्य स्रोतों से नामांकन और सिफारिशें मांगी गई थी। गृह मंत्रालय ने इन सभी और अन्य लोगों से गत 25 अप्रैल को आग्रह किया था कि वे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान करने वाले लोगों की पहचान कर उनके नामों की सिफारिश कर सकते हैं।

पद्म पुरस्कारों के लिए कैसे करें आवेदन

देश का कोई भी नागरिक किसी भी हस्ती को या स्वयं को नामांकित कर सकता है। नामांकन में प्रारूप के अनुसार सभी तथ्यों की विस्तार से जानकारी देनी होगी और साथ ही अधिक से अधिक 800 शब्दों में उस व्यक्ति के योगदान का वर्णन करना होगा। पद्म पुरस्कार वेबसाइट पर पुरस्कारों के लिए नामांकन या सिफारिश केवल ऑनलाइन की जा सकती है।

1954 में शुरू हुआ पद्म सम्मान

पद्म श्री , पद्म भूषण और पद्म विभूषण देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार। इन पुरस्कारों को वर्ष 1954 में शुरू किया गया था और इनकी घोषणा हर वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है। कला, साहित्य और शिक्षा, खेल , चिकित्सा, सामाजिक कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग , लोक मामले , सिविल सर्विस , व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली हस्तियों को इन पुरस्कारों से नवाजा जाता है।

किसे नहीं मिल सकता पद्म पुरस्कार

गृह मंत्रालय की ओर से यह अनुरोध किया जाता है कि महिलाओं , समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति और जनजाति तथा दिव्यांग श्रेणी के प्रतिभाशाली लोगों की पहचान का प्रयास किया जाना चाहिए। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्य सरकारी कर्मचारियों के नामों पर इन पुरस्कारों के लिए विचार नहीं किया जाता।

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Published on:
28 Aug 2018 08:04 pm
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