Coronavirus के कारण लागू Lockdown से बड़ा फायदा अब Bihar से दिखने लगा Mount Everest Rurki से Himalayas की गंगोत्री रेंज का भी हुआ दीदार
नई दिल्ली। दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस ( Coronavirus in india ) जैसी महामारी से जूझ रही है। देशभर में कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ रहा है। देशभर में 45 हजार से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं जबकि 1500 के करीब लोग इस घातक वायरस की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। यही वजह है कि देशभर में लॉकडाउन ( Lockdown ) की अवधि लगातार बढ़ाई जा रही है।
लॉकडाउन से भले ही कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन इसने कोरोना वायरस से निपटने के साथ-साथ प्रदूषण पर भी काफी हद तक काबू पा लिया है।
लॉकडाउन का ही नतीजा है कि गंगा ( Ganga River ) का पानी साफ हो गया है। कई वर्षों के बाद बिहार ( Bihar ) के लोगों को वहां से माउंट एवरेस्ट ( Mount Everest ) दिखने लगा है। यही नहीं रुड़की ( Roorkee ) से भी हिमालय ( Himalaya ) को सौंदर्य आसानी से देखा जा सकता है। ये सब संभव हुआ है लॉकडाउन की वजह से।
कोरोना वायरस के चलते भले हम लोग लॉकडाउन के कारण घरों में कैद हैं, लेकिन इस लॉकडाउन के ही कारण अब प्रकृति के खूबसूरत नजारे एक बार फिर हमारे सामने आ रहे हैं, जो कमोबेश प्रदूषण के चलते हमारी पहुंच से ही दूर हो गए थे।
बिहार से दिख रहा माउंट एवरेस्ट
माउंट एवरेस्ट पहाड़ों की सबसे ऊंची चोटी। जिसे फतह करने के लिए ना जाने कितनों लोगों मो जान की बाजी लगा दी। वही चोटियां अब बिहार से देखी जा सकती हैं। जो कई दशकों पहले संभव था।
स्थानीय लोग बताते हैं कि कई वर्षों या दशकों पहले भी बिहार के कुछ इलाकों से माउंट एवरेस्ट दिखाई देता था, लेकिन लगातार बढ़ते प्रदूषण ने इसे लोगों की पहुंच से दूर कर दिया।
आपको बता दें कि इंडियन फॉरेस्ट सर्विस ( IFS ) प्रवीण कासवान ने अपने ट्विटर पर एक पोस्ट साझा किया है। जिसमें बताया है कि बिहार के सिंहवाहिनी गांव से एवरेस्ट अब दिखाई दे रहा है।
लोगों की मानें तो वहीं से माउंटएवरेस्ट की दूरी करीब 200 किमी है और इतनी दूरी तो चिड़िया भी उड़ कर तय कर लेती है।
दरअसल लॉकडाउन के बाद से ही भारत में पहले सहारनपुर से हिमालय की चोटियां दिख रही थीं। फिर सिलीगुड़ी से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा भी दिखाई दी। इसके बाद अब रुड़की से हिमालय की गंगोत्री रेंज के पहाड़ दिखाई दे रहे हैं।
लॉकडाउन की वजह से वायु प्रदूषण भी काफी हद तक कम हुआ है। ऐसे में प्रकृति के नजारे अब आसानी से दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि रुड़की से 312 किमी दूर गंगोत्री रेंज की चोटियां भी अब दिख रही हैं।