केपी शर्मा ओली ने नेपाल को लेकर सीएम योगी के बयान को पूरी तरह से निंदनीय करार दिया है। योगी आदित्यनाथ नेपाल को डराने की कोशिश कर रहे हैं तो यह उचित नहीं है। यूपी के सीएम ने कहा था नेपाल को अपने देश की राजनैतिक सीमाएं तय करने से पहले परिणामों के बारे में भी सोच लेना चाहिए।
नई दिल्ली। कालापानी को लेकर नेपाल और भारत के बीच जारी बयानबाजी थम नहीं रहा है। अब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ( PM KP Sharma Oli ) ने सीमा विवाद के बीच अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( CM Yogi Adityanath ) पर निशाना साधा है। उन्होंने नेपाल को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान को पूरी तरह से निंदनीय करार दिया है।
योगी ने किया नेपाल का अपमान
नेपाल के नए नक्शे ( New Map of Nepal ) को वहां की संसद से मंजूरी मिलने के बाद पीएम केपी शर्मा ओली ने प्रतिनिधि सभा में कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ नेपाल को डराने ( Yogi threat to Nepal ) की कोशिश कर रहे हैं तो यह उचित नहीं है। वह मुख्यमंत्री के रूप में अगर वह ऐसी बात करते हैं तो यह आलोचना का विषय है। हम इसे नेपाल का अपमान समझते हैं। नेपाल ऐसी भाषा के लिए तैयार नहीं है। मैं योगीजी को याद दिलाना चाहूंगा कि हम इससे खुश नहीं हैं।
भारतीय सेना ने नेपाली क्षेत्र का अतिक्रमण किया
नेपाली संसद में अपने भाषण के दौरान केपी शर्मा ओली ने भारतीय सेना ( Indian Army ) पर अतिक्रण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कालापानी क्षेत्र में भारत ने अपनी सेना के जवानों को तैनात कर नेपाली क्षेत्र का अतिक्रमण किया है।
भारत ने काली मंदिर का निर्माण किया और कालापानी पर अपना दावा साबित करने के लिए एक कृत्रिम काली नदी बनाई। हमारी सरकार ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को प्राथमिकता दी है क्योंकि इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा के अन्य हिस्सों में नेपाली क्षेत्रों पर इस तरह कब्जा नहीं किया गया है।
सीमा तय करने से पहले परिणामों के बारे में सोच लेते
दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेपाली सरकार को चेताते हुए कहा था कि उसे अपने देश की राजनैतिक सीमाएं ( Political Boundaries ) तय करने से पहले परिणामों के बारे में भी सोच लेना चाहिए। उन्हें यह भी याद करना चाहिए कि तिब्बत का क्या हश्र हुआ? मुख्यमंत्री ने नेपाल के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते का हवाला दिया था और कहा था कि भारत और नेपाल भले ही दो देश हों लेकिन यह एक ही आत्मा हैं।
दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते हैं जो सीमाओं के बंधन से तय नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि नेपाल की सरकार को हमारे रिश्तों के आधार पर ही कोई फैसला करना चाहिए। अगर वह नहीं चेता तो उसे तिब्बत का क्या हाल है इस बात का ख्याल रखना चाहिए।