
नई दिल्ली। आकाश में ड्रोन विमानों को व्यावसायिक बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब भारतीय आकाश में ड्रोन विमान की उड़ान को अनुमति दे दी गई है। अनुमति पाने के लिए एक डिजिटल तंत्र स्थापित किया गया है। 'डिजिटल स्काई प्लेटफार्म' नाम का यह मोबाइल एप आधारित यह तंत्र मानवरहित यातायात प्रबंधन (यूटीएम) के रूप में काम करता है। यह अपनी तरह का पहला डिजिटल तंत्र है जो 'अनुमति नहीं तो उड़ान नहीं' के सिद्धांत को पारदर्शी ढंग से लागू करता है। हालांकि अभी यह खाने—पीने के सामानों की डिलीवरी के काम में नहीं लाया जा सकेगा। जबकि कृषि प्रयोजनों के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कीटनाशकों के छिड़काव के लिए उनका उपयोग नहीं किया जा सकता है।यह प्रक्रिया दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है।
मोबाइल एप पर जाकर पंजीकरण कराना होगा
ड्रोन का इस्तेमाला करने वालों को मोबाइल एप पर जाकर अपने ड्रोन,पायलट तथा मालिक का एक बार पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद प्रत्येक उड़ान के लिए इस पर अनुमति लेनी पड़ती है। सारी चीजें जांचने के बाद यह तुरंत अनुमति दे देता है अथवा इनकार कर देता है। विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि ड्रोन विमानों के व्यवसायिक उपयोग की अनुमति मिलने से भारतीय विमानन क्षेत्र में नया अध्याय शुरू हुआ है। उनका विश्वास है कि इससे कई नए रोमांचक एप्लीकेशन सामने आएंगे जिनसे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। इससे देश में मेड इन इंडिया'ड्रोन उद्योग का विकास हो सकेगा। विमानन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि हम विश्व में अग्रणी ड्रोन ईकोसिस्टम स्थापित करना चाहते हैं। इन नियमों से हम दुनिया के अग्रणी ड्रोन ईकोसिस्टम का हिस्सा बन जाएंगे। इसका लाभ सभी को मिलेगा।
ड्रोन से होगी परियोजनाओं की निगरानी
ड्रोन नियमों के लिए सरकर ने भारतीय आकाश को तीन जोन विभाजित किए हैं। रेड जोन में उड़ान वर्जित है। येलो जोन में नियंत्रित उड़ान हो सकती है। जबकि ग्रीन जोन उड़ानों की ऑटोमैटिक अनुमति वाला जोन है। इसी प्रकार वजन के अनुसार ड्रोन की पांच श्रेणियां रखी गई हैं। नैनो, माइक्रो, स्माल, मीडियम तथा लार्ज। नैनो तथा एनटीआरओ,एआरसी तथा केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रयुक्त ड्रोन को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों के ड्रोन का पंजीकरण कराना और उड़ान की पूर्वानुमति लेनी जरूरी है।