तलाक के मामला सुलझता न देख तेज की पत्‍नी ऐश्‍वर्या राय भी चिंतित हो उठी हैं। उन्‍हें लगने लगा है कि यह मामला नियंत्रण से बाहर हो गया है।
नई दिल्ली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के घर का संकट टलता नजर नहीं आ रहा है। तेजप्रताप के जिद के सामने सबने हार मान ली है। अभी तक राबड़ी देवी कहती नजर आ रही थीं कि वो मेरा बेटा है, देखना, मेरी बात मान लेगा। लेकिन अब वैसा होता नजर नहीं आ रहा है। इसके बावजूद वो तेज को मनाने में लगी हैं। तेजस्वी की ओर से भी बड़े भाई को मनाने का प्रयास जारी है। इस बीच खबर ये मिली है कि तेजप्रताप से सोमवार को हुई बातचीत के बाद राबड़ी ने अपने बड़े बेटे पर ही तलाक को निपटाने की जिम्मेदारी दे दी है। उनके इस कदम से ऐश्वर्या और उनकी मां की चिंता बढ़ गई है। उन्हें लगता है कि तेज नहीं मानेंगे और तलाक लेकर ही मानेंगे।
लालू की तबीयत पहले से ज्यादा खराब
इन सबके बीच तेज के पिता लालू प्रसाद यादव की तबीयत पहले से ज्यादा बिगड़ गई है। सोमवार को खराब तबीयत की वजह से वो पटियाला हाउस कोर्ट में हाजिर नहीं हो पाए। अदालत ने उन्हें अगली डेट में हर हाल में अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। जबकि लालू अपने दम पर चल भी नहीं पा रहे हैं। वे डिप्रेशन में चले गए बताए जा रहे हें। किडनी भी ठीक से काम नहीं कर रही। उनके दाहिने पैर में फोड़े की वजह से चलने में परेशानी हो रही है। उनपर डॉक्टर 24 घंटे नजर रख रहे हैं।
कृष्ण भक्ति में रमा मन
आपको बता दें कि तेज प्रताप यादव व ऐश्वर्या राय की शादी इसी साल 12 मई को धूमधाम से पटना में हुई थी। शादी के करीब छह महीने के बाद ही उन्होंने तलाक के लिए पटना परिवार न्यायालय में याचिका दायर की है। उनकी याचिका पर 29 नवंबर को सुनवाई होनी है। इस मामले में परिवार का समर्थन नहीं मिलने से नाराज होकर वे घर से दूर मथुरा-वृंदावन में घूम रहे हैं। पता चला है कि ऐश्वर्या की हरकत से वो इतने दुखी हैं कि अध्यात्म की ओर उनका झुकाव ज्यादा हो गया है। इन दिनों वो कृष्ण की भक्ति में तल्लीन दिखाई देते हैं। हालांकि बीच बीच में वे मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी से बात करते रहते हैं। तेज प्रताप ने बार-बार यही कह रहे हैं कि तलाक के मामले में उनका फैसला अटल है और वे अब ऐश्वर्या के साथ नहीं रह सकते। ऐसे में घुट-घुटकर जीने से कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्नी के व्यवहार से उन्हें काफी दुख पहुंचा है। बहुत दिन से झेल रहे थे, अब नहीं झेलना।