
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पत्रकार शुजात बुखारी के अंतिम संस्कार में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है। हजारों की संख्या में लोग राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी के जनाजे में हिस्सा लेने के लिए बारामुला स्थित उनके निवास पर एकत्र हो गए। उनको आखिरी विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में लोग जनाजे में शामिल हुए और आतंकियों को करारा जवाब दिया।
आतंकियों को करारा जवाब
शुजात बुखारी के जनाजे में उमड़ी भीड़ ने आतंकियों को एक बार फिर दिखा दिया कि आम कश्मीरी लोग उनके मंसूबों के पूरी तरह खिलाफ है। बता दें कि गुरुवार को श्रीनगर में तीन बाइक सवार आतंकियों ने राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हमले में बुखारी की सुरक्षा में तैनात दो जवानों की भी मौत हो गई थी।
ईद के पहले बहाया खून
जम्मू-कश्मीर में जर्नलिस्ट शुजात बुखारी की गुरुवार को गोली मारकर हत्या ऐसे मौके पर की गई है जब ईद का मुक्कदस मौका आने वाला है। बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने बुखारी पर उस वक्त गोलियां चलाई थीं जब वो लाल चौक के पास स्थित प्रेस एन्क्लेव के अपने ऑफिस से निकलकर इफ्तार पार्टी के लिए निकल रहे थे। कल शाम आतंकियों की गोलियों से मारे गए राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के बाद कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश में हड़कंप मच गया है।
एक्स कैटेगरी की मिली थी सुरक्षा
शुजात बुखारी को कई बार आतंकियों से पहले भी धमकियां मिल चुकीं थीं। एक साल पहले ही पाकिस्तानी आतंकियों से उन्हें धमकी मिली थी। जिसके बाद ही उन्हें एक्स कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। बुखारी पर हुए हमले में एक पुलिसकर्मी तथा एक आम नागरिक घायल हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि हमले में घायल दोनों लोगों की हालत गंभीर है। पुलिस ने यह भी बताया कि इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, जिनमें से एक की मृत्यु हो गयी है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमलावरों की संख्या कितनी थी।
कश्मीर की निर्भीक आवाज थे शुजात
शुजात बुखारी जम्मू-कश्मीर के जाने-माने पत्रकार थे। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन के प्रारम्भ से ही कश्मीर के हर मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई। शुजात ने राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ भी आवाज उठा चुके हैं। भारत के बाहर कई देशों में जाकर वो कश्मीरी जनता के दुःख दर्द की बात करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा कश्मीर में न्याय और शांति की वकालत की है। 90 के दशक में वे 'द हिन्दू 'नामक पत्र से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शुजात बुखारी वर्तमान में इस राइजिंग कश्मीर नामक पत्र में एडिटर थे।