Highlights. - आइसीएमआर की बात मानें तो यह ना तो बीमारी का बढऩा रोक रही है, ना ही लोगों की जान बचा पा रही है - केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री प्लाज्मा दान करने की अपील कर रहे हैं और जान बचने की बात भी कर रहे हैं - मरीजों में बीमारी के गंभीर रूप लेने से या मृत्यु होने से रोकने में प्लाज्मा थेरेपी बिल्कुल मददगार नहीं
नई दिल्ली.
क्या कोरोना मरीज को प्लाज्मा थेरेपी की मदद से बचाया जा सकता है? केंद्र सरकार के शीर्ष शोध संस्थान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की बात मानें तो यह ना तो बीमारी का बढऩा रोक रही है, ना ही लोगों की जान बचा पा रही है।
जिस स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत यह केंद्रीय संस्थान है, उसी के मंत्री लोगों से खूब प्लाज्मा दान करने की अपील कर रहे हैं, और जान बचने की बात भी कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने गुरुवार को ट्वीट कर प्लाज्मा डोनेशन की अपील की है। उन्होंने कहा है, ‘आगे आएं, कदम बढ़ाएं। बनें प्लाज्मा वारियर!
शोध में भी दावा
बीते बुधवार को ही आइसीएमआर ने दुनिया के सबसे बड़े अध्ययन के जरिए दावा किया है कि मरीजों में बीमारी के गंभीर रूप लेने से या मृत्यु होने से रोकने में प्लाज्मा थेरेपी बिल्कुल मददगार नहीं हो रही।
निर्देश किए जारी
इस शोध को आधार पर राज्य सरकारों को प्लाज्मा थेरेपी के प्रयोग को ले कर आगाह किया गया और दिशा-निर्देश भी जारी किए।
आइसीएमआर का शोध : बीमारी बढऩे या मृत्यु रोकने में नहीं मिल रही कोई मदद
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन: आगे आएं, कदम बढ़ाएं। बनें प्लाज्मा वारियर!