यह रॉकेट 25 साल में सिर्फ 2 बार ही विफल हुआ है । अब अगस्त 2017 के बाद इस रॉकेट का पहला प्रक्षेपण होगा।
बेंगलूरु: चार महीने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) फिर से उपग्रहों का प्रक्षेपण शुरू करेगा। कुछ सुधारों के बाद इसरो का विश्वसनीय रॉकेट पीएसएलवी सी-40 आगामी 10 जनवरी को उड़ान भरेगा। पीएसएलवी सी-40 अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह कार्टोसैट के साथ 28 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा, जिसमें 25 नैनो और तीन सूक्ष्म उपग्रह हैं। इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक आगामी 10 जनवरी को ध्यान में रखकर प्रक्षेपण की तैयारियां चल रही हैं। कार्टोसैट श्रृंखला उपग्रह बेंगलूरु स्थित इसरो उपग्रह केंद्र से भेजा जा चुका है और श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर इंटीग्रेशन का कार्य प्रगति पर है। पिछले 31 अगस्त को पीएसएलवी सी-39 पक्षेपण में मिली विफलता के बाद इसरो का यह पहला अभियान होगा।
विश्वसनीयता साबित करने की चुनौती
पीएसएलवी सी-39 की विफलता को ध्यान में रखते हुए इस मिशन में इसरो के सामने पीएसएलवी रॉकेट की विश्वसनीय साबित करने की चुनौती होगी। हीट शील्ड नहीं खुलने से पिछली लांचिंग में मिली नाकामी के बाद इस रॉकेट की तकनीक पर कई सवाल उठाए गए थे। हालांकि, इसरो अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने पीएसएलवी की सफलताओं का हवाला देते हुए कहा था कि संरचनागत तकनीक में कोई खामी नहीं है। फिर भी, कुछ बुनियादी तकनीकों को सुधारने और रॉकेट की मुख्य तकनीकों की नए सिरे से समीक्षा के बाद चार महीने के अंतराल पर इसरो फिर एक बार लांचिंग के लिए तैयार है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के.सिवन के अनुसार पे-लोड फेयरिंग यानी हीट शील्ड तकनीक में कुछ सुधार किया गया है और उसके परीक्षण पूरे भी किए जा चुके हैं।
हिटशील्ड नहीं खुलने पर मिशन हुआ था नाकाम
गौरतलब है कि पीएसएलवीसी-39 प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट के सभी चरणों का प्रदर्शन आशा के अनुरूप रहा लेकिन हीटशील्ड के नहीं खुलने से पूरा मिशन नाकाम हो गया। इसके चलते उपग्रह सहित रॉकेट का पूरा चौथा चरण अंतरिक्षीय कचरा बन गया। फिलहाल वह धरती की कक्षा में एक अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह की तरह चक्कर काट रहा है। यह पीएसएलवी के 25 वर्षों के इतिहास में केवल दूसरी विफलता थी। इस रॉकेट ने अभी तक 48 भारतीय और 209 विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक धरती की कक्षा में पहुंचाया है, जिसमें चंद्र और मंगल मिशन भी शामिल हैं। आगामी 10 जनवरी को सफल प्रक्षेपण के साथ ही इसरो अपने व्यस्ततम साल का आगाज करेगा जिसमें इसरो अध्यक्ष के अनुसार पीएसएलवी, जीएसएलवी और जीएसएलवी मार्क-3 के कई प्रक्षेपणों की योजना