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शोधकर्ताओं का बड़ा खुलासाः राजधानी दिल्ली की जहरीली हवा की वजह पाकिस्तान-नेपाल जैसे पड़ोसी देश

दिल्ली में वायु प्रदूषण ( air pollution in delhi ) की वजह को लेकर शोधकर्ताओं का बड़ा खुलासा। आईआईटी दिल्ली ( iit delhi research ), कानपुर के अलावा विदेशी संस्थान की दिल्ली के प्रदूषण ( delhi pollution news ) पर शोध। जहरीले प्रदूषकों ( Hazardous air pollutants ) के कारण राजधानी में बिगड़ता है माहौल ( Air Pollution )।

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Reasons behind Air Pollution in Delhi

नई दिल्ली। सर्दियों में राजधानी दिल्ली वैज्ञानिकों की बिगड़ती आबोहवा ( air pollution in delhi ) के कई कारण हैं। इनमें से वैज्ञानिकों ने तीन कॉरिडोर की पहचान की है। शोधकर्ताओं का दावा है कि दिल्ली में जहरीली होती हवा ( Hazardous air pollutants ) के लिए पाकिस्तान, ईरान और नेपाल जैसे कॉरिडोर जिम्मेदार हैं। दिल्ली की आबोहवा पर किए गए इस शोध को 15 शोधकर्ताओं की एक टीम ने अंजाम दिया। इनमें आईआईटी कानपुर और दिल्ली ( iit delhi research ) के अलावा स्विट्जरलैंड की वायुमंडलीय रसायन विज्ञान प्रयोगशाला भी शामिल है।

आईआईटी कानपुर में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष और इस शोध के लेखक एसएन त्रिपाठी ने रिसर्च के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसा माना जाता है कि दिल्ली में प्रदूषण उत्तर-पश्चिम दिशा से आता है। हालांकि हमें पता चला है कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में तीन अलग-अलग कॉरिडोर से प्रदूषक ( Air Pollution latest news ) पहुंचते हैं।

पहला कॉरिडोर उत्तर पश्चिम है जो पाकिस्तान, पंजाब और हरियाणा से प्रदूषित हवा लेकर दिल्ली पहुंचता है। दसूरा नॉर्थ-ईस्ट कॉरिडोर है जो उत्तर प्रदेश से प्रदूषक लेकर राजधानी आता है। वहीं, पूर्वी कॉरिडोर के जरिये नेपाल और उत्तर प्रदेश से प्रदूषक यहां पहुंचते हैं।

इससे पहले वर्ष 2018 में TERI और ARAI द्वारा एक शोध किया गया था। इसमें से पता चला था कि दिल्ली का 64 फीसदी प्रदूषण बाहर से जबकि 34 फीसदी एनसीआर के भीतर से पहुंचता है। वहीं, उत्तर पश्चिमी भारत से 18 फीसदी प्रदूषण यहां आता है।

उन्होंने आगे बताया कि पूर्वी कॉरिडोर से आने वाली हवाओं में सीसा, तांबा और कैडमियम ज्यादा मात्रा में पाई जाती थीं। इससे पता चलता कि यह हवाए वहां से आती हैं जहां पर सीसा आधारित उद्योग होने की संभावना हो सकते हैं। उत्तर पश्चिम कॉरिडोर से दिल्ली आने वाली हवाओं में सेलेनियम, ब्रोमीन और क्लोरीन जैसे तत्व प्रमुख मात्रा में मौजूद पाए गए।

ये तत्व उद्योगों, दवाओं और रसायनों की वजह से भी आने की संभावना हो सकती है। वहीं, क्लोरीन के आने की संभावना ईंट-भट्टों, कचरे के जलने जैसे स्थानों और कारखानों से होती है।

इस दौरान शोधकर्ताओं को ऐसे 35 तत्वों का पता चला, जिनमें से 26 तत्व अन्य की तुलना में यहां आने वाली हहवाओं में ज्यादा मात्रा में पाए गए। मोटे कणों के कुल द्रव्यमान का लगभग एक चौथाई हिस्सा यही इन 26 तत्वों में था। इसे ही PM 10 कहा जाता है।

वहीं, आईआईटी दिल्ली स्थित सेंटर फॉर एटमॉसफेरिक स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर दिलीप गांगुली ने बताया कि टीम ने हर 30 मिनट पर इसका डाटा एकत्रित किया और फिर उसका रीयल टाइम एनालिसिस भी किया। इससे यह बात साफ हुई कि दिल्ली में प्रतिदिन दो बार प्रदूषण सर्वोच्च शिखर पर पहुंचता है। इसमें पहला पीक तड़के 3 बजे से लेकर सुबह 8 बजे के बीच पहुंचता है। जबकि दूसरा पीक टाइम रात 10 बजे के आसपास रहता है।

वैज्ञानिकों ने इस शोध को वर्ष 2018 और 2019 की दो सर्दियों में पूरा किया। इसके लिए आईआईटी दिल्ली कैंपस से सैंपल जुटाए गए। इस शोध को एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशन के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।

Updated on:
22 Jun 2020 07:14 pm
Published on:
22 Jun 2020 05:02 pm
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