विविध भारत

आरक्षण के खिलाफ नहीं है संघ, हमारा पूरा समर्थन है और आगे रहेगा: मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि संघ कभी भी आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि आरक्षण पर हो रहे राजनीति के विरोध में खड़ा है।

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Sep 19, 2018
आरक्षण के खिलाफ नहीं है संघ, हमारा पूरा समर्थन है और आगे रहेगा: मोहन भागवत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली में 'भविष्य का भारत' कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को आरक्षण के संबंध में एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। मोहन भागवत ने कहा कि संघ कभी भी आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि आरक्षण पर हो रहे राजनीति के विरोध में खड़ा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मामले में संघ का पूरा समर्थन है और आगे रहेगा। सबको समान अवसर मिलना ही चाहिए। इसके अलावे एससी-एसटी के संबंध में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि किसी को इसका दुरुपयोग करने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार एससी-एसटी एक्ट के सही प्रारुप को सामने रखे जिससे लोगों के अंदर असुरक्षा का भाव न पनपे। बता दें कि मोहन भागवत ने आरक्षण को लेकर आगे कहा कि सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए संविधान में जितना आरक्षण दिया गया है संघ हमेशा उसका समर्थन करता है और आगे भी करेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आजाद भारत में आरक्षण कब तक रहना चाहिए इसका निर्णय वही करेंगे जिनके लिए संविधान में आरक्षण तय किया गया है। भागवत ने कहा कि सामाजिक विषमता को दूर कर सबके लिए बराबरी का हक मिलना ही चाहिए।

हर किसी को संविधान का आदर करना चाहिए: भागवत

आपको बता दें कि तीन दिवसीय इसकार्यक्रम के दूसरे दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ और हिंदुत्व के रिश्ते पर अपनी बात रखी। इस दौरान कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू, प्रकाश जावडेकर, जितेंद्र सिंह, राम माधव, दलबीर सिंह सुहाग, विजय गोयल, केसी त्यागी, सुब्रमण्यम स्वामी, उमा भारती, आरके सिंह, अमर सिंह आदि राजनेता मौजूद रहे। मोहन भागवत ने हिन्दुत्व के बारे में बोलते हुए कहा कि हमारा कोई शत्रु नहीं है, न देश में और न ही विदेश में। हां, हम कई लोगों के शत्रु होंगे और उनसे अपने आपको बचाते हुए उन्हें अपने साथ लेकर चलना ही हिंदुत्व है उन्होंने कहा कि संघ देश में सबका संतुलित और समन्वय विकास करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कहा गया है कि कमाना मुख्य नहीं है, उसको बांटना मुख्य है। हमारे हिंदुत्व के तीन आधार हैं- देशभक्ति, पूर्व गौरव और संस्कृति। मोहन भागवत ने आगे कहा कि आजाद भारत में हमने संविधान को स्वीकार किया है, जो कि हमारे ही महापुरुषों ने बनाया है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि देश का हर नागरिक संविधान को माने और संघ हमेशा से मानता रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान में नागरिक अधिकार, कर्तव्य और प्रस्तावना सभी कुछ है। सबको इसे मानकर ही चलना चाहिए।

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Published on:
19 Sept 2018 07:07 pm
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