केरल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर बार-बार स्‍टैंड बदलने पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि आपका स्‍टैंड हर बार बदल क्‍यों जाता है।
नई दिल्ली। केरल के सबरीमाला मंदिर में 15 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है। सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आठ दिनों तक सुनवाई करने के उपरांत एक अगस्त को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं को प्रवेश दिलाने के लिए इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन और अन्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
प्रवेश पर रोक गलत
इस मामले में जस्टिस मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ ने कहा था कि महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से अलग रखना संवैधानिक दृष्टि से उचित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देशों में अपने कुछ लोकतांत्रिक मूल्य होते हैं। इन मूल्यों के तहत महिलाओं के प्रवेश को कैसे रोका जा सकता है। यह महिलाओं के साथ असमान व्यवहार का प्रतीक है। इसलिए मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक पूरी तरह से गलत है।
केरल सरकार ने चार बार बदले स्टैंड
आपको बता दें कि 15 से 50 उम्र की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर केरल सरकार लगातार रुख बदलती रही है। अब तक केरल सरकार इस मुद्दे पर चार बार अपना रुख बदल चुकी है। 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा था कि वह महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के पक्ष में है। इससे पहले सरकार ने प्रवेश पर रोक का समर्थन किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार ने पूछा था कि आपका स्टैंड हर बार बदल क्यों जाता है।