
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे चेलमेश्वर ने एकबार फिर से न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन सुप्रीम कोर्ट को जमानत याचिकाएं सुननी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के क्षेत्राधिकार को फिर से देखे जाने की जरूरत है। जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार में विस्तार हुआ है, उससे समस्याएं बढ़ी हैं। यह कोर्ट केवल संवैधानिक मुद्दों पर फैसले के लिए थी। वहीं स्थायी संवैधानिक पीठ की जरूरत पर उन्होंने कहा कि इस मामले पर गौर किए जाने की आवश्यकता है।
जजों के ट्रांसफर पर उठाया सवाल
वहीं उन्होंने हाईकोर्ट के जजों की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें बदलाव और विचार करने की जरूरत है। किसी स्थानीय जज को इस सोच के साथ उस राज्य के हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नहीं बनाया जाता कि वह स्थानीय मसलों से प्रभावित होगा। अगर नीति के पीछे यही आधार है तो फिर तो मुख्यमंत्रियों का भी ट्रांसफर होना चाहिए क्योंकि कोई भी चीफ जस्टिस मुख्यमंत्री से ज्यादा प्रभावशाली और खतरनाक तो नहीं हो सकता। इसके साथ ही जस्टिस चेलमेश्वर ने जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया और पारदर्शी किए जाने की भी बात की।
जस्टिस चेलमेश्वर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सुर्खियों में आए थे
ये बातें सोमवार को जस्टिस चेलमेश्वर ने अप्वाइंटमेंट आफ जजेस टु दि सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया। ट्रांसपरेंसी, एकाउंटबेलिटी एंड इंनडिपेन्डेंस किताब के विमोचन के अवसर पर कही। बता दें कि जस्टिस जे चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों में से एक हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका स्थान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद आता है। जस्टिस चेलमेश्वर तीन अन्य जजों के साथ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुर्खियों में आए थे। जस्टिस चेलमेश्वर पिछले कुछ महीनों से न्यायिक व्यवस्था में सुधार की दलीलें लेकर काफी मुखर रहे हैं।