
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर राज्य को एक विशेषाधिकारी देने वाली धारा 370 पर लगातार विवाद होता रहा है। इसको हटाने को लेकर देशभर में आवाजें उठती रही है। इसी कड़ी में देश की सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर की गई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को धारा 370 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और इसकी सुनवाई 2019 के अप्रैल तक के लिए टाल दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अभियोजन आवेदन (आईए) दाखिल कर सकते हैं।
अप्रैल 2019 में होगी सुनवाई
आपको बता दें कि बीते 14 नवंबर को कोर्ट ने कहा था कि धारा 370 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अप्रैल 2019 के पहले हफ्ते में करेगी। क्योंकि इस संबंध में केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपल ने कहा था कि इस मामले पर अभी सुनवाई नहीं होनी चाहिए। वेणुगोपाल ने इसके लिए घाटी में जारी संवेदनशील परिस्थिति को आधार बताया था। बता दें कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच कर रही है। मालूम हो कि संविधान के अनुच्छेद 35ए को भी चुनौती दी गई है।
कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35A को हटाना चाहती है भाजपा
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से यह कहती रही है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35A को हटाना चाहिए। भाजपा का तर्क है कि धारा 370 के कारण देश का आम नागरिक कश्मीर से कट गया है। उनके अधिकार सीमित हो गए हैं। धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर को भारत से एक अलग पहचान के तौर पर देखा जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि इसे हटाया जाए। हालांकि इस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक दलों में विरोधाभास भी देखने को मिला है। क्योंकि 2014 के आम चुनाव भाजपा ने यह वादा किया था कि यदि वह केंद्र की सत्ता में आती है तो जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटा लिया जाएगा। लेकिन अब जब सरकार को साढ़े चार वर्ष पूरे हो गए हैं तो भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।