त्रिपुरा पीपल्‍स फ्रंट ने एनआरसी में संशोधन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है।
नई दिल्ली। असम के बाद अब त्रिपुरा में एनआरसी को अपडेट करने की मांग शुरू हो गई है। त्रिपुरा के एक संगठन ने इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। शीर्ष अदालत ने याचिका स्वीकार करने के बाद केंद्र सरकार, जनगणना आयुक्त, चुनाव आयोग और विदेश मंत्रालय से इस बारे में राय मांगी है।
यहां रहने वाले अधिकांश लोग प्रवासी
त्रिपुरा पीपल्स फ्रंट (टीपीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य से सभी अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की मांग करते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि एनआरसी का गठन 1951 में हुआ था। अब इसे अपडेट करने की सख्त जरूरत है। याचिका में इस बात का भी जिक्र है कि त्रिपुरा में रहने वाले प्रवासियों में ज्यादातर बांग्लादेशी हैं। पिछले पांच दशकों के दौरान त्रिपुरा में बांग्लादेशी प्रवासियों की गैर कानूनी तरीके से बड़े पैमाने पर घुसपैठ हुई है। इससे राज्य के जनसंख्या ढांचे में काफी बदलाव आया है।
गैर आदिवासी राज्य बना त्रिपुरा
याचिका में कहा गया है कि त्रिपुरा एक आदिवासी राज्य था, लेकिन पांच दशकों के दौरान बड़े पैमाने पर घुसपैठ की वजह से यह एक गैर आदिवासी राज्य बन गया है। त्रिपुरा के मूल निवासी बोरोक अल्पसंख्यक बन गए हैं। इससे न केवल जननांकीय संतुलन बिगड़ा बल्कि आदिवासियों के हाथ से राजनीतिक नेतृत्व भी निकल गया है।
सीएम ने की थी एनआरसी लागू करने की बात
आपको बता दें कि त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब ने हाल में ही कहा था कि अगर असम में एनआरसी सफल रहता है तो वह त्रिपुरा में भी इसे लागू करेंगे। असम में एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट दो महीने पहले जारी हुआ था। ड्राफ्ट जारी होने के बाद एनआरसी को लेकर देश भर में काफी हंगामा मचा। इस ड्राफ्ट के आधार पर 40 लाख लोगों को अवैघ नागरिक करार दिया गया। अवैध नागरिक करार दिए गए लोगों का असम में रहना मुश्किल है। हालांकि असम सरकार ने एनआरसी से बाहर रह गए लोगों को उसमें नाम दर्ज कराने का एक और मौका दिया है।