Highlights.- गुलाम नबी आजाद की कल राज्यसभा सदस्य और नेता प्रतिपक्ष पद से हो रही विदाई - आजाद के बाद कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खडग़े को नेता प्रतिपक्ष पद की जिम्मेदारी दी है - मल्लिकार्जुन खडग़े को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का करीबी नेता माना जाता है
नई दिल्ली।
गुलाम नबी आजाद की कल यानी 15 फरवरी को राज्यसभा से विदाई हो रही है। वह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं और इसी के साथ वह इस पद को भी छोड़ देंगे। सभी इस उहापोह में थे कि उनके बाद कांग्रेस किसे नेता प्रतिपक्ष पद की जिम्मेदारी देगी। हालांकि, अब यह सस्पेंस खत्म हो चुका है।
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि आजाद के बाद पार्टी के भरोसेमंद नेता और सोनिया गांधी के करीबी माने जाने वाले मल्लिकार्जुन खडग़े इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। आपको बता दें कि राज्यसभा में कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए नेता प्रतिपक्ष उसी की पार्टी से होगा। वर्ष 2014 में एनडीए जब केंद्र की सत्ता में आई तो कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को नेता प्रतिपक्ष बनाया था। हालांकि, उनकी विदाई के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खास माने जाने वाले मल्लिकार्जुन खडग़े को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। ... तो जानते हैं खडग़े के बारे में कुछ खास बातें-
दरअसल, कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 78 साल के खडग़े के नाम पर फैसला सोनिया गांधी की ओर से लिया गया। सोनिया गांधी ने वर्ष 2014 में कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की मौजूदगी
के बावजूद खडग़े को लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया था। खडग़े का नाम सामने आने पर तब बहुत से लोग हैरान हुए थे।
कांग्रेस की ओर से लोकसभा में खडग़े को जब नेता सदन पद की जिम्मेदारी मिली, तब यह उनका दूसरा कार्यकाल था। इससे पहले के कार्यकाल में वह मनमोहन सिंह सरकार मे केंद्रीय मंत्री थे। श्रमिक आंदोलनों में लंबे समय तक सक्रिय रहे खडग़े को श्रम मामलो का विशेषज्ञ भी माना जाता है। बतौर वकील वह श्रम संबंधी मुकदमे हाथ में ज्यादा लेते थे।
वैसे तो मल्लिकार्जुन खडग़े पहली बार राज्यसभा में चुनकर आए हैं। हालांकि, अनुभव और काबिलियत के चश्मे से देखें तो वह नेता प्रतिपक्ष के लिए सक्षम और ईमानदार छवि के नेता माने जाते हैं।
कर्नाटक की राजनीति में दमदार नेता
उनका पूरा नाम मपन्ना मल्लिकार्जुन खडग़े है। 12 जुलाई 1942 को उनका जन्म तत्कालीन हैदराबाद के बीदर जिले में हुआ था। हालांकि, अब वह कर्नाटक में आता है। खडग़े को कर्नाटक कांग्रेस का दमदार नेता माना जाता है।
गुलबर्गा से रहे सांसद
खडग़े वर्ष 2009 से लेकर 2019 तक दो बार लोकसभा सदस्य रहे। तब वे गुलबर्गा से सांसद थे। वर्ष 2019 में भाजपा के उमेेश जाधव ने उन्हें हरा दिया था। इसके बाद कांग्रेस उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद में ले आई। कर्नाटक से वह 9 बार विधायक भी रहे।
कांग्रेस का दलित चेहरा
खडग़े कर्नाटक में कांग्रेस का दलित चेहरा हैं। वे गरीब और ईमानदार छवि के राजनेता हैं। गांव से पढ़ाई के बाद शहर में कॉलेज की शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने वकालत पढ़ी। पढ़ाई के दौरान वह छात्रनेता के तौर पर उभरे। वकालत करने के बाद श्रमिक आंदोलनों से जुड़ गए।
अच्छे खिलाड़ी भी रहे खडग़े
खडग़े खेलकूद में भी आगे रहे। उनके स्कूल टीचर करीब 11 साल पहले कहा था उन्हे कबड्डी, हॉकी और फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। स्कूल की तरफ से उन्होंने जिला स्तर व संभाग स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। हालांकि, पढऩे में वह औसत छात्र थे।
ज्यादा चर्चा में नहीं रहते
खडग़े का राजनीतिक करियर लंबा व शानदार है, मगर राजनीति में ज्यादा चर्चा में नहीं रहते। हालांकि, लोकसभा में कांगे्रस के नेता के तौर पर उन्होंने अक्सर अच्छे भाषण दिए। खडग़े के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी बात के पक्के हैं। वादा करने के बाद उसे हर हाल में निभाते हैं।
परिवार में पत्नी और पांच बच्चे
खडग़े के परिवार में पत्नी राधा बाई के अलावा उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और दो बेटे शामिल हैं। उनके एक बेटे का बेंगलुुरु में बड़ा हास्पीटल है। उनके पास संपत्ति भी करीब 10 करोड़ है। लोकसभा में हार के बाद वे पिछले साल जून में कर्नाटक से राज्यसभा के लिए सर्वसम्मति से जीते थे।