Supreme Court में प्रवासी मजदूरों ( migrant labourers ) के मसले पर सुनवाई सरकार का जवाब- अब तक 91 लाख मजदूरों migrant labourers को पहुंचाया घर
नई दिल्ली। देश में कोरोना संकट ( Coronavirus ) और उसकी रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन ( Lockdown ) की वजह से प्रवासी मजदूरों ( migrant labourers ) को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रवासी मजदूरों ( migrant Workers ) से जुड़ीं तमाम समस्याओं से ज़ुड़े मसले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने सुनवाई की।
इस दौरान केंद्र सरकार ( Modi Goverment ) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ( Solicitor General Tushar Mehta ) ने कोर्ट को प्रवासी मजदूरों की मौजूदा स्थिति के बारे में अवगत कराया।
वहीं, शीर्ष अदालत ने सरकार की ओर से मजदूरों के लिए की गए रेल टिकट ओर खाने-पीने के इंतजामों को लेकर सवाल किए।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि क्या मजदूरों को रेल टिकटों का पैसा लिया जा रहा है?
इसके जवाब में तुषार मेहता ने कहा कि कुछ जगहों पर टिकट का खर्च राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जा रहा है, जबकि कुछ राज्य में रेलवे यह पैसा रिइंबर्स कर रही है।
प्रवासी मजदूरों के मामले में काफी गंभीर दिखी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कौल ने सवाल किया कि इस बात की पुष्टि कैसे की जाए कि मजदूरों से पैसे की मांग नहीं की जा रही और उनको परेशानी भी नहीं उठानी पड़ रही है।
इस सवाल के जवाब के लिए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से समय मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार प्रवासी मजदूरों को किए गए कामों की जानकारी दी। केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि...
• प्रसासियों के लिए 1 मई से 27 मई तक रेलवे ने 3700 ट्रेनों का संचालन किया
• इन ट्रेनों के माध्यम से अभी तक 91 लाख मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया
• प्रवासियों के लिए संचालित ट्रेनों को एक राज्य से दूसरे राज्य में दोनों की सहमति के बाद ही भेजा जा रहा है।
• ट्रेन यात्रा के दौरान रेलवे ने 84 लाख मजदूरों के लिए मुफ्त खाने की व्यवस्था की।
• इन प्रवासी मजदूरों में 80 प्रतिशत से अधिक संख्या बिहार और उत्तर प्रदेश जान वालों की रही
• रेलवे ने केवल उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए ही 350 से अधिक श्रमिक ट्रेनों का संचालन किया
• इन श्रमिक ट्रेनों को सभी मजदूरों के घर पहुंचने तक चलाया जाएगा