
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme court ) ने महिलाओं को भारतीय नौसेना ( Indian Navy ) में स्थायी कमिशन देने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाएं अब पुरुष अधिकारियों के समान दक्षता के साथ नौकायन ( Sail ) कर सकती हैं। इस मामले में महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सामाजिक और मानसिक कारण बताकर महिला अधिकारियों को सेना में समान अवसर ( Equal opportunity ) से वंचित रखना भेदभाव वाला है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी कमीशन ( Permanent Commission ) देने में महिला अधिकारियों की शारीरिक सीमाओं का हवाला देने वाली केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक भी लगा दी है। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से महिला अफसरों को सेना शिक्षा कोर, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स और इंटेलिजेंस कोर में स्थायी कमीशन देरे का रास्ता खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने से पहले केंद्र सरकार ने 11 मार्च को लोकसभा ( Loksabha ) में कहा था कि सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के लिए वह तैयार हैं। साथ ही सरकार ने कहा कि वह इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरा पालन करेगी। रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने टीएमसी सांसद सौगत रॉय के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी थी।
रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा था कि हम कोई भेदभाव नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी गंभीरता के साथ पालन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने अपने आदेश में कहा था कि सेना में महिलाओं को स्थायी तैनाती मिलनी चाहिए और पुरुष अधिकारियों की ही तरह उन्हें सैन्य कमान में भी तैनात किया जाना चाहिए।
क्या होता है स्थायी कमिशन
स्थायी कमिशन ( Permanent Commission ) का मतलब है कि कोई अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है। इसके बाद वह पेंशन का भी हकदार होगा। इसके तहत वे अधिकारी भी स्थयी कमिशन में जा सकती हैं जो अभी शॉर्ट सर्विस कमिशन में काम कर रही हैं। शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत अधिकारियों को 14 साल में रिटायर कर दिया जाता है। उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है। इससे पहले महिलाएं केवल 10 साल तक ही नौकरी कर पाती थीं।
सेना में अधिकारियों की कमी पूरी करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू किया गया था। इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही शामिल किया जाता था। लेकिन स्थायी कमिशन के लिए केवल पुरुष ही अप्लाइ कर सकते थे। दिक्कत यह थी कि कम समय में रिटायर होने के बाद रोजगार का संकट पैदा होता है और साथ ही एक उम्र के बाद दूसरी जगह नौकरी करने की उम्मीद भी कम हो जाती है।