सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) में रेहाना फातिमा ( rehana fathima ) की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई। अर्ध-नग्न शरीर ( woman semi ***** ) पर नाबालिग बच्चों द्वारा पेंटिंग ( Body paint ) कराता वीडियो किया था अपलोड। केरल उच्च न्यायालय ( Kerala High Court ) ने 24 जुलाई को खारिज कर दी थी महिला की याचिका।
नई दिल्ली। केरल की एक्टिविस्ट रेहाना फ़ातिमा ( rehana fathima ) द्वारा अर्ध नग्न शरीर ( SemiNude Condition ) पर अपने नाबालिग बच्चों से पेंटिंग ( Body paint ) करवाने वाले एक विवादास्पद वीडियो को लेकर अग्रिम जमानत की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट की हरकत को अपवाद स्वरूप लिया।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीश पीठ ने इस मामले में टिप्पणी की कि इस तरह के कार्य बुराई वाले हैं और बच्चों को देश की संस्कृति के बारे में गलत धारणा देते हैं। जस्टिस मिश्रा ने पूछा, "आप एक एक्टिविस्ट हो सकती हैं, लेकिन आप ये सब क्यों करती हैं? यह कैसी बकवास है? आपके बच्चों के ऊपर देश की संस्कृति के बारे में क्या छाप पड़ेगी?"
अदालत फातिमा एएस द्वारा दायर अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पोक्सो अधिनियम, 2012 ( POCSO Act ) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 के तहत अपराध के लिए गिरफ्तारी की आशंका है। महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें उसके दो नाबालिग बच्चों ने जून में उसके अर्ध-नग्न शरीर ( woman seminude ) पर पेंटिंग की।
इस मामले में केरल उच्च न्यायालय ( Kerala High Court ) ने 24 जुलाई को उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, "यह अश्लीलता है और आप इसे फैला रही हैं। यह बहुत खराब माहौल छोड़ देगा।"
फातिमा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि उनके खिलाफ चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं और अश्लीलता से संबंधित नहीं। शंकरनारायणन ने अदालत से कहा, "यह चाइल्ड पोर्नोग्राफी कैसे हो सकती है? बच्चों को पूरी तरह से कपड़े पहनाए गए हैं।"
उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता कोई ऐसी महिला नहीं है जो फरार हो जाएगी और इस मामले में हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, पीठ ने आरोपी के खिलाफ अपराधों को प्रथम दृष्टया भांपते हुए मामले को खारिज कर दिया। फातिमा ने अपनी याचिका में यह प्रतिवाद किया था कि वास्तव में महिला नग्नता, अश्लीलता नहीं है और अपनी मां के शरीर पर पेंटिंग करने वाले बच्चों को बाल शोषण नहीं माना जा सकता है। वीडियो के साथ अपलोड किए गए उनके संदेश में कहा गया कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए महिला रूप को सामान्य बनाने का इरादा किया था ताकि उनके दिमाग में कामुकता को लेकर विकृत विचार ना आ सकें।
वहीं, इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, "याचिकाकर्ता को लगता है कि उसे अपने बच्चों को यौन शिक्षा देनी चाहिए। उस उद्देश्य के लिए वह अपने बच्चों को अपने अर्ध नग्न शरीर पर पेंट करने के लिए कहती है और फिर सोशल मीडिया पर उसी को अपलोड करती है। मैं याचिकाकर्ता से सहमत होने की स्थिति में नहीं हूं कि वह अपने बच्चों को इस तरह से यौन शिक्षा दे।"