
नई दिल्ली। देश में कोरोना संकट ( Coronavirus Crisis ) के बीच सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने कोविड-19 ( COVID-19 ) के मरीजों और शवों के प्रबंधन में बरती जा रही लापरवाही का स्वत: संज्ञान लिया है। Supreme Court ने कहा कि कोरोना टेस्ट ( Corona Test ) के लिए देश में एक समान रियायती दर सुनिश्चित की जाएं। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही सभी हॉस्पिटलों के कोरोना वार्ड ( Corona Ward ) में CCTV कैमरे लगाने का आदेश दिया।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कहा कि एक्सपर्ट की टीम लगातार हॉस्पिटलों का दौरा करें और कमियों को दूर करने का प्रयास करें। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केंद्र सभी राज्यों को कोरोना टेस्ट के लिए रियायती दरें तय करने के लिए कहे। इस केस में सुनवाई कर रही जस्टिस अशोक भूषण ( Ashok Bhushan) , संजय किशन कौल (Sanjay Kishan Kaul) और एम.आर. शाह ( M.R. Shah) वाली पीठ ने इस संबंध में केंद्र सरकार से एक कमेटी का गठन करने के लिए कहा। यह कमेटी राज्यवार कोरोना टेस्ट की दरें सुनिश्चित कराने का करे।
केस में सुनवाई कर रहे जस्टिस शाह ने केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) से कहा कि कई राज्यों कोरोना टेस्ट की दर 2,200 रुपये है, जबकि कुछ में 4500 रुपए लिए जा रहे है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि टेस्ट की रियायती दरें सुनिश्चित करना केंद्र सरकार का काम है कोर्ट का नहीं।