
नई दिल्ली।
वाहनों में कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के उपयोग से सडक़ हादसों में कमी हो सकती है। विदेशों में एआइ तकनीक वाले वाहन आ चुके हैं जबकि देश में अभी काम चल रहा है। अधिकांश वाहन निर्माता कंपनियां चालक रहित और एआइ तकनीक वाले वाहनों को लेकर शोध कर रही हैं। इन वाहनों में तकनीक के साथ कीमत भी कंपनियों के लिए एक बड़ा मसला है।
तीन संस्थाओं ने किया शोध
कंपनी नेत्रडाइन ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी) व किराए की कार वाली एक कंपनी के साथ सवा साल शोध किया। 500 कारों में एआइ डिवाइस लगाया। 250 कारों में वॉइस अलर्ट सुविधा ऑन रखी। सित्बर 2018 से 2019 के बीच 1 लाख ट्रिप में चालकों के 5 लाख घंटे वाहन चलाने व 1.6 करोड़ मील की निगरानी की।
चालकों के व्यवहार में आएगा बदलाव
एआइ उत्पाद कंपनी नेत्रडाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश अग्रवाल के अनुसार चालकों में थकान, जल्दीबाजी, ध्यान भटकना, झपकी या सीट बेल्ट न लगाना जोखिम भरा होता है। अगर कार के अंदर का कैमरा चालू हो तो एआइ तकनीक चालक को सचेत करेगी। इस तकनीकी से चालकों के व्यवहार में भी बदलाव लाया जा सकता है।
हादसे कम करने में मददगार
भारतीय विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक राजेश सुंदेशरन के अनुसार,
मल्टी-सेंसर फ्यूजन, ऑब्जेक्ट रिकग्निशन, इवेंट डिटेंशन और विचलित ड्राइविंग अलर्ट वाले एआइ सिस्टम हादसों को कम करने में मददगार सिद्ध हो सकते हैं। शोध में साफ हुआ कि एआइ के सहारे सुरक्षित ड्राइविंग को प्रभावी बनाया जा सकता है।