
नई दिल्ली। पिछले कई मानसून सत्र सियासी ड्रामे की भेंट चढ़ते आए हैैं। इस बार भी यही उम्मीद जताई गई थी,मगर ऐसा हो न सका। सभी आशंकाओं को गलत साबित करते हुए इस सत्र में न सिर्फ गतिरोधों की संख्या कम हुई बल्कि कई महत्वपूर्ण बिल भी पास हुए। इस लिहाज से देखा जाए तो इस सत्र ने दो दशक का रिकॉड तोड़ दिया है। लोकसभा ने करीब दो दशक के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए मानसून सत्र में सबसे ज्यादा विधायी कामकाज की मिसाल बनाई है। लोकसभा ने जहां अपने तय समय से भी अधिक 118 फीसद काम किया,वहीं राज्यसभा ने भी अपने 74 प्रतिशत समय का सदुपयोग किया।
दोनों सदनों में 20 विधेयक पारित हुए
दोनों सदनों में करीब 20 बिल पारित किए गए है। इसमें एक संविधान संशोधन विधेयक समेत कई अहम बिल शामिल हैं। वैसे सत्र के दौरान 22 बिल पेश किये गए जिसमें 21 लोकसभा में हुए। छह बिल अध्यादेश की जगह लाए गए। केवल 17 बैठकों के इस सत्र में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने, एसी-एसटी उत्पीड़न कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने संबंधी बिल, भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, भ्रष्टाचार संशोधन विधेयक से लेकर राष्ट्रीय खेल-कूद विश्वविद्यालय बनाने संबंधी दूरगामी महत्व के विधेयक पारित किये गए।
यादगार रहा संसद का मानसून सत्र
लोकसभा आठ घंटे में 26 मिनट हंगामे की भेंट चढ़ा। मगर सांसदों ने 20 घंटे 43 मिनट अतिरिक्त काम कर न केवल इसकी भरपाई की बल्कि ज्यादा काम किया। राज्यसभा में 27 घंटे में करीब 42 मिनट हंगामे की भेंट चढ़ा। इसमें माननीयों ने देर तक बैठकर तीन घंटे की भरपाई की। इसे लेकर खुद सभापति वेंकैया नायडू ने सत्र समापन के मौके पर कहा कि पहले के मुकाबले इस बार अधिक कामकाज हुआ है। विधायी कामकाज के हिसाब से तो बीते दो सत्रों की तुलना में अकेले इसी सत्र में राज्यसभा ने 140 फीसद ज्यादा विधायी काम किये। सभापति ने इस बेहतर कामकाज के लिए खासतौर पर राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद को भी श्रेय दिया। संसदीय शोध पर काम करने वाली संस्था पीआरएस के मुताबिक सन 2000 के बाद इतने छोटे मानसून सत्र में लोकसभा ने सबसे अधिक काम का रिकॉर्ड बनाया है।