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तबाही मचाने वाले इस तूफान को क्यों पुकारा जा रहा ‘फानी’, जानिए नाम के पीछे की असल कहानी

ओडिशा के तट से टकराया पिछले 20 साल का सबसे खतरनाक तूफान 'फानी'। तूफानों के नाम कौन और क्यों रखता है, इसके पीछे की कहानी है दिलचस्प। हिंद महासागर के आठ देशों ने वर्ष 2004 में भारत की पहल करने के बाद तूफानों के नामकरण का सिलसिला शुरू किया था।

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क्यों ओडिशा में आए तूफान का नाम पड़ा तितली, जानिए इनके पीछे की मूल वजह

नई दिल्ली। पिछले 20 वर्षों के दौरान सबसे भयानक और तेज रफ्तार वाला चक्रवात फानी ओडिशा के पुरी में आ चुका है। इसकी भयावहता भांपते हुए पहले ही ओडिशा प्रशासन ने सावधानी और सुरक्षा के उपाय अपना लिए और करीब 11 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। हालांकि यहां सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह जानना है कि आखिर इस चक्रवात का नाम फानी क्यों पड़ा? क्यों तूफानों-चक्रवातों के नाम अजीब से होते हैं?

Fani Cyclone अब ओडिशा से सिर्फ 80 कि.मी. दूर, पिछले 20 साल का सबसे खतरनाक चक्रवात

सबसे पहले बात करते हैं फानी की तो इस चक्रवाती तूफान का संबंध बांग्लादेश से है। बांग्लादेश ने ही इस चक्रवात को फानी नाम दिया। मौसम विभाग के मुताबिक यह उत्तरी हिंद महासागर से उठने वाला चक्रवात है।

बता दें कि हिंद महासागर के आठ देशों ने वर्ष 2004 में भारत की पहल के बाद तूफानों के नामकरण का सिलसिला शुरू किया था। हिंद महासागर के इन आठ देशों में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, मालदीव, थाईलैंड और ओमान शामिल हैं।

रियाटर कर दिए जाते हैं नाम

अब अगर बात करें हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवाती तूफानों की, तो इनके नाम भारतीय मौसम विभाग रखता है। चक्रवाती तूफान तब बनते हैं जब हवा की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रतिघंटा या इससे ज्यादा हो और कुछ देर के लिए बनी रहे। इन तूफानों का नाम रखने के लिए आठ सूची हैं और इनका इस्तेमाल क्रमानुसार किया जाता है। यह नाम कुछ वर्षों बाद फिर से भी इस्तेमाल कर लिए जाते हैं जबकि कई नाम रिटायर भी कर दिए जाते हैं।

पाकिस्तान ने इससे पहले समुद्री तूफानों का नाम वरदा, नरगिस, फानूस, लैला और निलोफर भी रखा है। वहीं, आठ देशों के अब तक दिए गए 32 तूफानों की सूची में हिंदुस्तान ने लहर, मेघ, सागर और वायु नाम दिए हैं। अगर क्रमानुसार बात करें तो वरदा के बाद वाले तूफानों में तितली, बुलबुल, गाजा और फानी का नाम आता है।

बहुचर्चित हेलेन तूफान का नामकरण बांग्लादेश ने किया था। जबकि म्यांमार ने तूफानों के नाम क्यांत और नानुक नाम दिए थे। वहीं, ओमान ने हुदहुद और नाडा। इसके अलावा उत्तरी हिंद महासागर में दो तूफान आने वाले हैं उनके नाम भी रखे जा चुके हैं, जो वायु, क्यार, माहा, बुलबुल, पवन, हिक्का और अंफान हैं।

यह है अनोखे नाम रखने के पीछे की वजह

तूफानों के नाम अक्सर रोचक या अनोखे रखे जाते हैं। इसके पीछे की वजह यह होती है कि मौसम विभाग, मौसम से जुड़ी चेतावनी, भविष्यवाणी आदि को लेकर आम जनत तक आसानी से अपनी बात पहुंचा सके। अलग ढंग के नाम होने की वजह से इनसे जुड़ा कम्यूनिकेशन आसान हो जाता है। यानी अनोखे और आसान शब्दों वाले तूफान के नाम रखने का मकसद लोगों तक जानकारी पहुंचाना और जागरूकता फैलाना होता है।

कब हुई थी नामकरण की शुरुआत

सबसे पहले 20वीं सदी के प्रारंभ में ऑस्ट्रेलिया के भविष्यवक्ता ने चक्रवाती तूफान का नामकरण किया था। इसका नाम एक राजनेता के नाम पर रखा गया था, जिसे वो कतई पसंद नहीं करते थे। वहीं, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रशांत महासागर में आने वाले चक्रवाती तूफानों के नाम रखने में बिल्कुल अनोखा ढंग अपनाया गया। इन तूफानों के नाम अमरीकी सेना, नौसेना और वायुसेना के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा उनकी पत्नियों-गर्लफ्रेंड आदि महिलाओं के नाम पर दिए जाने लगे। हालांकि अटलांटिक क्षेत्र में चक्रवाती तूफानों के नामकरण को लेकर 1953 में एक औपचारिक संधि हुई, जिसके बाद यह नाम महिलाओं के नाम पर रखे जाने लगे।

Updated on:
03 May 2019 10:01 am
Published on:
11 Oct 2018 11:20 am
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