
सैन फ्रांसिस्को. सोशल मीडिया के दिग्गज प्लेटफार्म ट्विटर ने मंगलवार को अपनी 11वीं बायएनुअल ट्रांसपेरेंसी (जनवरी से जून 2017 तक) रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जहां एक ओर कंपनी ने सरकारों के आग्रह पर कई यूजर्स की तथाकथित विवादित पोस्ट्स को प्लेटफार्म से नहीं हटाया तो वहीं दूसरी ओर आतंकवाद को बढ़ावा देने के काम में जुटे करीब 3 लाख ट्विटर अकाउंट्स को पिछले 6 माह के दौरान हटा दिया है।
वहीं भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत 261 खातों की जानकारी मांगी थी और 102 खातों को बंद करने का अनुरोध भी भेजा था। जोकि गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 55 फीसदी अधिक है। हालांकि सरकार, पुलिस और अदालत के अनुरोध के बाद भी किसी भी खाते और किसी भी ट्वीट को नहीं हटाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने बताया कि इस अवधि में आतंकवाद से जुड़े 2,99,649 खातों को हटाया गया है, जिसमें पिछली अवधि के मुकाबले 20 फीसदी की गिरावट आई है। ट्विटर के अनुसार 1 अगस्त, 2015 से 30 जून, 2017 तक आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कुल 9,35,897 खातों को निलंबित किया गया है। जबकि इस बार अमरीका के कैलिफोर्निया प्रांत से सबसे ज्यादा 44 फीसदी शिकायतें मिली थी।
बता दें कि मार्च 2017 में ट्विटर ने पोस्ट की कैटेगरी तय करना शुरू किया था। इसमें अपमानजनक व्यवहार, कॉपीराइट, और ट्रेडमार्क समेत अन्य श्रेणियां शामिल है। इससे पहले सिर्फ आतंकवाद संबंधी पोस्ट ही अलग से श्रेणीबद्ध की जाती थी। वहीं ट्विटर ने विभिन्न देशों की सरकारों की ओर से सरकारी सेवा शर्तों के तहत आने वाले अनुरोध के आंकड़ें भी सार्वजनिक किए।
ट्विटर पर ‘अपमानजनक व्यवहार’ के तहत 98 प्रतिशत वैश्विक सरकारी सेवा शर्तों के अनुरोध आए थे। इनकी जांच के आधार पर केवल 13 प्रतिशत पोस्ट पर कार्रवाई की गई थी। बाकी को दरकिनार कर दिया गया, क्योंकि यूजर्स की ओर से पोस्ट सामग्री ने हमारी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया था।