
Balrampur news (Demo pic)
राजपुर. शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त (Deputation terminated) करने के लिए शिक्षा मंत्री के स्पष्ट निर्देश जारी हुए 1 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बलरामपुर जिले के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास (आजाक) विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि संलग्नीकरण समाप्त करने के बजाय विभाग ने प्रधान पाठक मुन्ना लाल धुर्वे को जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी का दायित्व सौंप रखा है।
सहायक आयुक्त आजाक विभाग ने कहा कि मुन्ना लाल धुर्वे शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण (Attachment) समाप्त होने से पहले से ही आजाक विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं तथा उनका वेतन-भत्ता आजाक विभाग द्वारा दिया जा रहा है। हालांकि विभाग के ताजा स्पष्टीकरण ने मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सहायक आयुक्त समीक्षा जायसवाल ने कहा है कि धुर्वे की प्रतिनियुक्ति संबंधी कोई आदेश उपलब्ध नहीं है और न ही आजाक विभाग द्वारा उन्हें प्रतिनियुक्ति भत्ता दिया जाता है।
विभाग का कहना है कि 5 मार्च 2019 के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर उन्हें प्रतिनियुक्त माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठता है कि यदि प्रतिनियुक्ति का कोई विधिवत आदेश ही उपलब्ध नहीं है तो उन्हें प्रतिनियुक्त कर्मचारी किस वैधानिक आधार पर माना जा रहा है।
सामान्यत: प्रतिनियुक्ति के लिए सक्षम प्राधिकारी का आदेश, अवधि का निर्धारण तथा सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक होता है। यदि कर्मचारी को प्रतिनियुक्त माना जा रहा है तो नियमानुसार प्रतिनियुक्ति भत्ते की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
5 मार्च 2019 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रम शालाओं में कार्यरत अधीक्षक सह प्रधान पाठक पद का नामकरण प्रधान पाठक किया गया तथा इन पदों को स्कूल शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया गया।
आदेश में स्पष्ट प्रावधान है कि जहां आजाक विभाग में अधीक्षक का पृथक पद स्वीकृत है और उस पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया प्रचलन में है, वहां पद भरने तक वर्तमान में अधीक्षक (Superintendent) का कार्य कर रहे व्यक्ति को ही अधीक्षक के पद पर यथास्थिति प्रतिनियुक्ति अथवा प्रभार पर माना जाएगा। अर्थात आदेश का लाभ केवल उन शिक्षकों को दिया गया है जो संबंधित आश्रम शालाओं में अधीक्षक का दायित्व निभा रहे थे। आदेश में अन्य पदों अथवा प्रशासनिक दायित्वों पर कार्यरत कर्मचारियों को स्वत: प्रतिनियुक्त मानने का कोई उल्लेख नहीं है।
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि यदि मुन्ना लाल धुर्वे आश्रम अधीक्षक (Hostel Superintendent) के रूप में कार्यरत नहीं थे तो 5 मार्च 2019 के आदेश के किस प्रावधान के तहत उन्हें प्रतिनियुक्त माना जा रहा है। विभाग द्वारा प्रतिनियुक्ति आदेश सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति तथा वैधानिक आधार सार्वजनिक किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला वास्तविक प्रतिनियुक्ति का है या संलग्नीकरण व्यवस्था को किसी अन्य स्वरूप में जारी रखने का।
Updated on:
03 Aug 2026 01:23 pm
Published on:
03 Aug 2026 01:23 pm
