खुद और संस्था के सदस्यों से बनवाए मास्क संस्था के सदस्यों में भी बांटे जा चुके हैं खादी मास्क कई कलाओं से जुड़ी हुई हैं आरुषि निशंक
देश में कई लोग और संस्थाएं कोरोना (corona)से लड़ने में जुटी हुई हैं। ऐसे में बड़ी हस्तियां भी लोगों को प्रेरित कर रही हैँ। हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी सविता कोविंद ने भी अपने हाथ से मास्क बनाकर बांटे थे। ये मास्क दिल्ली के शेल्टर होम्स के लोगों में बांटे गए थे। अब केंद्रीय मंत्री की बेटी ने ऐसा बीड़ा उठाया है। उसने यह मास्क सेना के जवानों के लिए बनाए हैं।
सेना को सौंपे मास्क
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' की बेटी आरुषि निशंक ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू देशव्यापी तालाबंदी का सदुपयोग करते हुए घर पर ही खादी के मास्क बनाए और बनवाए हैं। आरुषि और उनकी संस्था 'स्पर्श गंगा' की ओर से 10 हजार खादी के मास्क बनाए गए हैं। आरुषि ने बुधवार को ये सभी मास्क सेना को सौंप दिए। आरुषि और उनकी संस्था के बनाए खादी मास्क का उपयोग धोकर एक से अधिक बार किया जा सकता है। बुधवार को आरुषि ने दिल्ली के आर्म्ड फोर्सेस क्लीनिक में जाकर भारतीय सेना को 10 हजार मास्क सौंपे।
घर पर रहकर लड़ रहे हैं कोरोना से लड़ाई
इस अवसर पर आरुषि निशंक ने कहा कि- 'हम लॉकडाउन का पालन करते हुए घर पर रहकर कोरोना वायरस से लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि हमारे सैनिक सीमा पर दुश्मन और खतरनाक वायरस, दोनों से एक साथ निपट रहे हैं।'
अपनी संस्था के सदस्यों के लिए भी बनाए मास्क
इससे पहले, उनके पिता रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने यह जानकारी दी कि उनकी बेटी आरुषि लॉकडाउन के दौरान किस तरह वक्त गुजार रही हैं। उन्होंने कहा था- 'मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई कि मेरी बेटी आरुषि घर पर स्वयं खादी के मास्क बनाकर अपने स्टाफ के कर्मचारियों को वितरित कर रही है और उनको कोरोना वायरस से बचने के लिए सजग भी कर रही है।' सैनिकों को मास्क देने से पहले आरुषि निशंक ने खादी के मास्क बनाकर अपने स्टाफ के सभी लोगों को भी दिए थे।
कई कलाओं से जुड़ी हुई हैं आरुषि निशंक
आरुषि निशंक प्रख्यात भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना, पर्यावरणविद्, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आरुषि ने गंगा नदी के धरती पर आने की कहानी पर आधारित 'गंगा अवतरण' एवं सूफियाना शास्त्रीय कथक नृत्य 'सजदा' जैसी रचनाओं की कोरियोग्राफी भी की है। आरुषि को उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार भी मिला है। उन्होंने साल 2018 में अपनी पहली क्षेत्रीय फिल्म 'मेजर निराला' का निर्माण किया था, जो उनके पिता के लिखे उपन्यास पर आधारित है।