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CBI Vs CBI: नंबर-1 और नंबर-2 के बीच लड़ाई की क्या है वजह, जानिए सबकुछ यहां

दिल्ली हाई कोर्ट ने अस्थाना को गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। लेकिन एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई।
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CBI Vs CBI: नंबर-1 और नंबर-2 के बीच लड़ाई की क्या है वजह, जानिए सबकुछ यहां

नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित जांच एजेंसी सीबीआई विवादों में है। एजेंसी की छवि धूमिल ना हो इसके लिए केंद्र सरकार ने डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है। वहीं एम नागेश्वर राव को अंतरिम चीफ नियुक्त कर दिया है। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने अस्थाना को गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। लेकिन एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई।

सरकार ने दी सफाई

दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से दावा किया कि आलोक वर्मा केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का सहयोग नहीं कर रहे थे। सरकार ने कहा कि एजेंसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ 'भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों' की वजह से एक 'असाधारण और अभूतपूर्व' स्थिति बन गई थी। सीबीआई में आपसी विवाद का माहौल अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे इस अहम संस्था की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को गहरा धखा पहुंचा जबकि इसके अलावा संगठन में कामकाज का माहौल भी दूषित हुआ है।

सीबीआई में सियासी तूफान

सवाल उठना लाजिमी है कि सीबीआई में अचानक ऐसा बवंडर कैसे आ गया। सूत्रों के मुताबिक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच एजेंसी में काम करते हुए भी कभी अच्छे संबंध नहीं रहे, दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहे। आइए जानते हैं सीबीआई में घमासान की शुरुआत कब और कैसे हुई।

अक्टूबर से शुरू हुई खींचतान
आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच तकरार कोई एकाएक सामने नहीं आया। पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई जब सीबीआई डायरेक्टर ने CVC के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर को आगे बढ़ाए जाने पर सवाल खड़े किए थे।

अस्थाना का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

राकेश अस्थाना पर आलोक वर्मा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के इंडक्शन को लेकर उनके द्वारा की गई सिफारिश को राकेश अस्थाना ने बिगाड़ दिया। वर्मा ने ये भी आरोप लगाया था कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका के कारण CBI भी घेरे में आ गई। इसपर पैनल ने वर्मा की आपत्ति को खारिज करते हुए अस्थाना को प्रमोट कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी राकेश अस्थाना को क्लीन चिट दे दी। 12 जुलाई को जब आलोक वर्मा विदेश में थे, CVC ने सीबीआई में प्रमोशन को लेकर चर्चा करने के लिए मीटिंग बुलाई जिसमें अस्थाना को एजेंसी में नंबर 2 की हैसियत से बुलाया गया। इस पर वर्मा ने CVC को लिखा कि उन्होंने अपनी तरफ से मीटिंग में शामिल होने के लिए अस्थाना को अधिकृत नहीं किया है।

अस्थाना ने लगाए वर्मा पर आरोप
अस्थाना ने दावा किया कि हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना ने मोइन कुरैशी केस से खुद को बचान के लिए आलोक वर्मा को 2 करोड़ रुपये की घूस दी। 15 अक्टूबर को CBI ने सना से 3 करोड़ की घूस लेने के आरोप में अस्थाना के खिलाफ केस दर्ज किया।

अस्थाना ने सीवीसी को दी सफाई
-पिछले हफ्ते अस्थाना ने फिर से CVC और कैबिनेट सेक्रटरी को लिखा और कहा कि वह पिछले महीने सना को गिरफ्तार करना चाहते थे लेकिन वर्मा ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि फरवरी में जब उनकी टीम ने सना से पूछताछ की कोशिश की थी, तो वर्मा ने फोन कर रोक दिया।

अस्थाना से कामकाज वापस लिया
मंगलवार 23 अक्टूबर को आलोक वर्मा ने अस्थाना से सारे कामकाज वापस ले लिए। इसमें आईआरसीटीसी घोटाला, पी चिदंबरम और अन्य के खिलाफ जांच शामिल थी। अस्थाना के स्टाफ का भी तबादला कर दिया गया।

व्यापारी ने लगाए अस्थाना पर आरोप
4 अक्टूबर को सीबीआई ने सना को पकड़ा और उसने अस्थाना के खिलाफ मैजिस्ट्रेट के सामने बयान दे दिया। सना ने दावा किया कि 10 महीने में उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपए दिए हैं।

मामले में जुड़े सभी अधिकारियों को हटाया गया

वहीं केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के 13 अन्य अधिकारियों का भी तबादला कर दिया है। इस कदम के साथ केंद्र ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले की जांच कर रहे लगभग सभी अधिकारियों को हटा दिया है।

Updated on:
24 Oct 2018 07:08 pm
Published on:
24 Oct 2018 07:08 pm
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