
नई दिल्ली। दुनिया में बाढ़ से होने वाली मौतों में भारत का स्थान पांचवा है। विश्व बैंक के एक अध्ययन के परिप्रेक्ष्य में सरकारी आंकड़ों से इस बात की जानकारी मिली है। अध्ययन में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन 2050 तक देशों की आबादी के आधे हिस्से के जीवन स्तर के मानकों को कम कर देगा।
64 वर्षो में भारी बारिश और बाढ़ से 107,487 लोगों की मौत
राज्यसभा में 19 मार्च को पेश किए गए केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 1953 से 2017 के बीच 64 वर्षो में भारी बारिश और बाढ़ के कारण करीब 107,487 लोगों की मौत हो गई। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 365,860 करोड़ रुपए की फसलों, घरों और जन सुविधाओं यानी देश की वर्तमान जीडीपी का करीब तीन फीसदी का नुकसान हुआ।
बाढ़ के मुख्य कारणों में छोटी अवधि में हुई भारी बारिश
राज्यसभा में दिए गए जवाब की माने तो, 'बाढ़ के मुख्य कारणों में छोटी अवधि में हुई भारी बारिश, खराब या अपर्याप्त जल निकासी क्षमता, अनियोजित जलाशय नियमन और बाढ़ नियंत्रण संरचनाओं की विफलता शामिल है।' वहीं, 28 जून को प्रकाशित विश्व बैंक के अध्ययन में कहा गया कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में तापमान में वृद्धि हुई और सभी व्यावहारिक जलवायु परिदृश्य के तहत अगले कुछ दशकों में इसके लगातार बढ़ने की संभावना है। इन बदलावों के परिणामस्वरूप अधिक बाढ़, पानी की भारी मांग और ताप से संबंधित चिकित्सा बीमारियां बढ़ेंगी।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्य
विश्व बैंक के नए अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि 2050 तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्य होंगे। 10 में से सात सबसे प्रभावित जिले महाराष्ट्र के विदर्भ से होंगे। सरकारी इकाई राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, भारत बाढ़ से सबसे असुरक्षित देश है। कुल भौगोलिक क्षेत्र 32.9 करोड़ हेक्टेयर (एमएचए) में से 40 एमएचए से अधिक बाढ़ उन्मुख क्षेत्र है।
हर साल 1,600 से अधिक लोगों की मौत
आपको बता दें कि हर साल 1,600 से अधिक लोगों की मौत बाढ़ के कारण होती है, जबकि 3.2 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं। हर साल 92 हजार पशु अपनी जान गंवा देते हैं और 70 लाख हेक्टेयर जमीन प्रभावित होती है। साथ ही 5,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है।