
नई दिल्ली। हर साल 8 मई को विश्व रेड क्रॉस दिवस (World Red Cross Day) मनाया जाता है। आज ही के दिन इसके संस्थापक या जनक जॉन हेनरी डिनैंट का जन्म हुआ था। हेनरी का जन्म 8 मई, 1828 में हुआ था। उनके जन्म दिन को ही विश्व रेडक्रॉस दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसका प्रमुख कार्य मानव सेवा है। इस संस्था को साल 1917, 1944 तथा 1963 में नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त दिया गया है। यह संस्था युद्ध तथा शांति के वक़्त विश्वभर के देशों की सरकारों के बीच समन्वय का कार्य करती है। 8 मई को मानवतावादी संगंठन और उसकी ओर से मानवता की सहायता के लिए अभूतपूर्व योगदान के लिए श्रद्धांजलि देने के लिए याद करते हैं। आज कोरोना महामारी में उसी की सबसे ज्यादा जरूरत है। कोरोना काल में चाहे मास्क या ग्लब्स बांटना हो या फिर ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता हासिल करना हो, रेडक्रॉस कोरोना के खिलाफ उसी तरह अपनी सेवाएं दे रही है जैसे वह युद्ध में देती है।
पहली बार 1948 में मनाया गया रेड क्रॉस दिवस :-
पहला रेड क्रॉस दिवस हेनरी ड्यूनेंट के जन्मदिवस की सालगिरह 8 मई, 1948 को मनाया गया। उनको साल 1901 में शांति का नेबेल पुरस्कार मिला था। यह दिवस आधिकारिक तौर पर 1984 में वर्ल्ड रेडक्रॉस और वर्ल्ड क्रिसेंट डे के रूप में मनाया गया। जिस तरह से रेडक्रॉस संस्था ने अपने लंबे इतिहास में बिना किसी एक देश के प्रति निष्ठा दिखाकर मानवता के प्रति निष्ठा दिखाई है।
महामारी और आपदा में पीड़ितों की मदद करना :-
रेड क्रॉस सोसाइटी का मुख्य लक्ष्य विपदा और युद्ध के समय होने वाली परेशानियों में लोगों की मदद करना। युद्ध के चलते घायल सैनिकों की सहायता करना तथा उनका इलाज उपचार इसके प्रमुख लक्ष्यों में रहा है। जबकि यह संस्था ब्लड बैंक से लेकर विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य और समाजसेवाओं में अपना किरदार निभा रहा है। मानव सेवा को मूल कार्य मानने वाली यह संस्था महामारी जैसी आपदा में भी पीड़ितों की मदद करती है। सफेद पट्टी पर लाल रंग का क्रॉस का चिह्न इस संस्था का निशान है, जिसका गलत उपयोग करने पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है तथा यहां तक कि दोषी शख्स की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।
भारत में इसकी स्थापना:-
भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना वर्ष 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के मुताबिक की गई। भारत में रेडक्रॉस सोसाइटी की 700 से भी ज्यादा शाखाएं हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी के सिद्धांतों को मान्यता वर्ष 1934 में 15वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्राप्त हुई, जिसके पश्चात् इसे विश्वभर में लागू किया गया। विश्व के करीब 210 देश इस संस्था से जुड़े हुए हैं।