नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए दुनिया को परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ रहे खतरे की प्रति चेतावनी भी दी।
नई दिल्ली। इस साल का नोबेल पीस पुरस्कार एक अंतर्राराष्ट्रीय परमाणु हथियार विरोधी संगठन (ICAN) को दिया गया है। शुक्रवार को नॉर्वे नोबेल कमेटी ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए दुनिया को परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ रहे खतरे की प्रति चेतावनी भी दी। बता दें कि नोबेल पुरस्कार की कीमत 9 मिलियन यानी 90 करोड़ के आसपास है। इस समय दुनिया के 101 देशों में इसकी 468 सहयोगी काम कर रहे हैं. सिविल सोसायिटी के लोग पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर काम कर रही है ।
100 से भी अधिक देशों में काम कर रहा
आईकैन एक अंतर्राराष्ट्रीय परमाणु हथियार विरोधी गैर सरकारी संगठन है, जो दुनिया के 100 से भी अधिक देशों में काम कर रहा है। इसकी शुरुआत 2007 को वियना में की गई थी और संगठन ने अपने काम की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से की थी। इस दौरान नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति के नेता बेरिट रेस-एंडर्सन ने कहा कि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहां परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बता दें कि 2012 में 122 देशों ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु हथियार विरोधी संधि को स्वीकार किया था। जिसमें परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध की बात कही गई थी. लेकिन इस संधि से अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फांस ने खुद को अलग कर लिया था। इसके अलावा कई और परमाणु हथियार संपन्न देशों ने भी इस पर रुचि नहीं दिखाई थी।
परमाणु हथियारों को सीमित करने का प्रयास
दरअसल, नोबेल पुरस्कार-2017 अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ रहे परमाणु तनाव के साथ यूएस-ईरान 2015 की डील अनिश्चितता के बीच निरस्त्रीकरण के मामले को मजबूत करने का प्रयास करता हैै। जिसका असर तेहरान के साथ-साथ मुख्य परमाणु शक्तियों के परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करने के तौर पर देखा जा सकता है। बता दें कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान समझौते को समझौते को अब तक सबसे खराब समझौता बताया था।