अमरीका में मंगलवार को राष्ट्रपति चुनाव हैं। इन पर पूरी दुनिया की नजर है। राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप के सामने चुनावी मैदान में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडेन डटे हैं। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पूर्व सलाहकार और नेशनल यूएस इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की संस्थापक व सीईओ पूर्णिमा वोरिया से राष्ट्रपति चुनाव को लेकर 'पत्रिका' की बातचीत।
डेनवर.
कोरोना रोकने के प्रबंधन में नाकामी क्या अहम मुद्दा है?
पूर्णिमा- डेमोक्रेट्स सोच रहे हैं कि यह ट्रंप की कमजोरी है पर यह उनकी गलतफहमी है। जैसे भारत में मोदी ने तुरंत लॉकडाउन किया व उस समय ऐसा लगा कि कितना सकारात्मक काम किया है, लेकिन उसके बाद मजदूरों के साथ भयावह स्थिति उत्पन्न हुई और सब कुछ बदल गया। यहां भी ऐसी ही स्थिति हुई। अमरीका में लोगों को घर में रोक कर रखना बहुत मुश्किल है। इसमें ट्रंप को दोष देना मेरे हिसाब से गलत होगा। मैं समझती हूं कि कोरोना सारे विश्व के लिए समझ से परे का विषय है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह कोरोना काल में देश को संभाला, वह अच्छा ही कहा जाएगा। अगर किसी को दोष देना चाहिए तो वह है चीन।
श्वेत-अश्वेत का मुद्दा अहम है?
पूर्णिमा- यह मुद्दा अहम है। इससे वोट काफी मात्रा में बंट जाएंगे।
इंडियन अमरीकन वोटरों की मुख्य समस्याओं पर किस उम्मीदवार का क्या रवैया है?
पूर्णिमा- इंडियन अमरीकन मुद्दे इमिग्रेशन, शिक्षा, पर्यावरण व कट्टरपंथी भेदभाव से जुड़े हैं। हम सोचते हैं कि एक उम्मीदवार हमारा भला करेगा पर वास्तव में ऐसा होता नहीं है। हर उम्मीदवार वही बोलता है, जो लोग सुनना चाहते हैं। जब वे वाइट हाउस पहुंच जाते हैं तो वादे भूल जाते हैं।
क्या आव्रजन नीति और नागरिकता नियम का मामला एक अहम कारक साबित होगा?
पूर्णिमा- हां, ये होंगे, लेकिन इतने नहीं। इस पढ़े-लिखे देश में भी लोग भेड़चाल में विश्वास करते हैं, लेकिन शायद इस समय सब पॉलिसी को छोड़ कोरोना से मारे गए २.३५ लाख लोगों का मुद्दा बना रहे हैं। जिस तरह जॉर्ज फ्लॉयड की मौत पर लोगों को बरगलाने के लिए ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ कैंपेन चलाया गया और इससे देश के लोगों को बांटने की कोशिश कर ट्रंप प्रशासन को कमजोर दिखाने और उनके वोट तोडऩे के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
एच1-बी और एल1 वीजा में कठिनाई को किस तरह देखती हैं?
पूर्णिमा- ट्रंप का कैंपेन स्लोगन है- मेक अमरीका ग्रेट अगेन, न कि मेक इंडिया ग्रेट बाय गिविंग जॉब्स टु इंडियंस। एक देश का राष्ट्रपति होने के कारण यह उनका प्रथम कर्तव्य है कि वे अपने देश के नागरिकों के हितों को सुरक्षित करें। ट्रंप लीगल एच1-बी और एल1 वीजा के लिए भी तैयार हैं पर जो लोग अवैध और गलत तरीके से फर्जी कागजात बनाकर आए हैं, वे उन लोगों को देश से बाहर निकालना चाहते हैं। ट्रंप अपने देश के लोगों की जॉब्स बचाना चाहते हैं।
ट्रंप और बाइडेन की खूबियां...।
पूर्णिमा- ट्रंप बिजनेसमैन हैं। वे देश को एक बिजनेस की तरह चलाते हैं, फालतू खर्च रोकते हैं। मसलन उन्होंने कई बेकार हो चुकी एजेंसीज बंद कर दीं। इस तरह के कठोर निर्णयों से उन्होंने करदाताओं के पैसे बचाए और दूसरे अहम कामों में लगा दिए। ट्रंंप हमेशा वही नीति अपनाते हैं जिससे देश को ज्यादा फायदा हो। मेरी नजर में बाइडेन के साथ ऐसा नहीं है।
दोनों उम्मीदवारों की कमियां...।
पूर्णिमा- ट्रंप मुंहफट हैं। लोगों को साथ लेकर नहीं चलते हैं और असंतुष्ट होने पर उन्हें तुरंत उनके पदभार से हटा देते हैं। बाइडेन का मानसिक संतुलन मुझे विचार करने पर मजबूर करता है। सोचना पड़ता है कि क्या उन्हें कमांडर इन चीफ बनाकर उनके हाथ में न्यूक्लियर बटन देना चाहिए या नहीं? और अगर उनके हाथ यह बटन आ गया तो कहीं वह यह बटन दबा कर तीसरा विश्व युद्ध तो शुरू नहीं कर देंगे? एक तथ्य सामने आया है कि बाइडेन एक भ्रष्ट राजनेता हैं। वाल स्ट्रीट जर्नल ने उनके कंप्यूटर से पक्के सबूत निकाले हैं और ईमेल से इसे साबित कर दिया है।