
नई दिल्ली। सर्दी के इस मौसम में गर्मागर्म कॉफी पीना किसे अच्छा नहीं लगता। बात सिर्फ जाड़े के मौसम का ही नहीं है बल्कि गर्मी के मौसम में भी कोल्ड कॉफी का अपना अलग ही मज़ा है लेकिन क्या कभी कोई बस कॉफी पी सकता है? ऐसा कहने पर कोई भी इंसान आपको पागल समझ सकता है और समझे भी क्यों न, आखिर बात ही कुछ ऐसी है। लेकिन ये बात बिल्कूल 100 प्रतिशत सच है। दुनिया में एक ऐसा बस है जो कि कॉफी के फ्यूल से चलता है। तो चलिए इस बारे में हम आपको पूरी बात बताते है। दरअसल ब्रिटेन में कॉफी के कचरे से एक ऐसे तेल का निर्माण किया गया है जो कि पेट्रोल के विकल्प के तौर पर काम करेगा।
कहने का अर्थ ये है कि कॉफी के कचरे से तैयार किया गया ये तेल ज्वलनशील है जिसके चलते इसका उपयोग गाडिय़ों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। इस तेल को बनाया है ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी कंपनी बायो-बीन ने। इस तेल को डीजल में मिलाकर जैव ईंधन में परिवर्तित किया गया है। अब इस ईंधन को बस चलाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इस कंपनी का कहना है कि उनके पास इतनी मात्रा में पर्याप्त ईंधन है जिससे कि लगभग एक साल तक ब्रिटेन की सड़को पर बसों को चलाया जा सकता है। आपको शायद ये लगें कि इस ईंधन से चलने वाले वाहनों की गति में कमी आएगी तो आप बिल्कूल गलत है। इस ईंधन से चलने वाले वाहनों की गति में कोई परिवर्तन नहीं आयेगा।
जैव ईंधन कुकिंग ऑयल और मीट फैट जैसी चीजों से तैयार किया जाता है और ये एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में कार्य करता है। जानकारों का कहना हैकि इस तेल के उपयोग से परिवहन उत्सर्जन में कॉफी मदद मिलेगी। तो अब गैस या पेट्रोल नहीं बल्कि कॉफी से चलने वाली बसें ब्रिटेन के सड़कों पर दौड़ती हुई नज़र आएगी।