HIGHLIGHTS चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ( Global Times ) ने धमकी देते हुए कहा है कि यदि अमरीकी सेना फिर से ताइवान ( Taiwan ) वापस लौटी तो चीन युद्ध छेड़ देगा। ग्‍लोबल टाइम्‍स के संपादक हू शिजिन ने अमरीका और ताइवान को धमकी देते हुए कहा कि चीन अलगाव रोधी कानून एक ऐसा टाइगर है जिसके दांत भी हैं।
बीजिंग। अमरीका और चीन ( America China Tension ) के बीच लगातार तनाव का माहौल गहराता जा रहा है और अब ताइवान मामले को लेकर दोनों देश एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने आ गए हैं। इसी महीने अमरीकी अधिकारियों के ताइवान दौरे को लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। यहां तक कि एक सख्त संदेश देने के लिए अपने 18 लड़ाकू विमानों को ताइवान के हवाई क्षेत्र के करीब भेज दिया था। अब एक बार फिर से चीन ने ताइनवा और अमरीका दोनों को धमकी दी है।
चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ( Global Times ) ने धमकी देते हुए कहा है कि यदि अमरीकी सेना फिर से ताइवान वापस लौटी तो चीन युद्ध छेड़ देगा। ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू शिजिन ने अमरीका और ताइवान को धमकी देते हुए कहा कि चीन अलगाव रोधी कानून एक ऐसा टाइगर है जिसके दांत भी हैं।
बता दें कि एक अमरीकी जर्नल ने ये सुझाव दिया था कि ताइवान की सुरक्षा के लिए अमरीकी सेना को वहां भेज देना चाहिए। इसके जवाब में ग्लोबल टाइम्स के एडिटर हू शिजिन ने ये चेतावनी दी है। हू शिजिन ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'मैं अमरीका और ताइवान में इस तरह की सोच रखने वाले लोगों को निश्चित रूप से चेतावनी देना चाहता हूं। एक बार अगर वे ताइवान में अमरीकी सेना के वापस लौटने का फैसला करते हैं तो चीनी सेना निश्चित रूप से अपने क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए एक न्याय युद्ध शुरू कर देगी। चीन का अलगाव रोधी कानून एक ऐसा टाइगर है जिसके दांत भी हैं।'
अमरीकी जर्नल ने ताइवान में सेना भेजने का दिया था सुझाव
आपको बता दें कि एक अमरीकी सैन्य जर्नल ने एक सुझाव दिया था कि ताइवान में अमरीकी सेना को भेजा जाना चाहिए। इसी संदर्भ में ग्लोबल टाइम्स ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर अमरीका सेना भेजता है तो इससे अमरीका और चीन के बीच हुआ समझौता टूट जाएगा। यह एक पागलपन भरा सुझाव है, जो ताइवान की जनता के लिए ठीक नहीं है। लेकिन यदि फिर भी यह सही होता है तो चीनी सेना PLA कड़ी कार्रवाई करेगी और ताकत के बल पर ताइवान का एकीकरण करेगी। ताइवान में विदेश हस्तक्षेप और ताइवान के अलगाव समर्थक लोगों के खिलाफ ताइवान स्ट्रेट में चल रहे व्यापक युद्धाभ्यास को लेकर भी ग्लोबल टाइम्स ने जमकर भड़ास निकाली।
मालूम हो कि इससे पहले भी अमरीकी सैन्य पत्रिका में ये सुझाव दिया गया था कि पूर्वी एशिया में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन अमरीका और ताइवान से हटकर चीन की ओर जा रहा है। लिहाजा ताइवान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध अमरीका को सेना की तैनाती पर विचार करना होगा। आगे यह भी कहा गया था कि ताइवान पर चीनी हमले का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिए एक व्यापक उपाय करने की जरूरत है। आपको बता दें कि 1979 में ताइवान रिलेशन एक्ट के तहत अमेरिका कानूनी रूप से ताइवान की मदद के लिए बाध्य है।
ताइवान की सीमा के करीब हजारों चीनी सैनिक तैनात
गौरतलब है कि चीन ने हाल कि दिनों में युद्धाभ्यास के नाम पर ताइवान सीमा के पास भारी संख्या में सैनिकों और हथियारों व लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी है। इसके बाद चीन बार-बार ताइवान की सीमा में घुसकर ताइपे को उकसाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जंग की आशंका तेज हो गई है।
पिछले कुछ दिनों में चीन ने 40 से अधिक बार ताइवान सीमा में अपने लड़ाकू विमान भेजे और घुसपैठ करने की कोशिश की। हालांकि हर बार ताइवान ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए खदेड़ दिया। चीनी हमले के खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने सैन्या तैयारियों का जायजा लिया, जिसके बाद ताइवानी सेना ने भी जोरदार युद्धाभ्यास किया।
ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'ताइवान की वायुसेना किसी को धमकी नहीं देती है और न ही सैन्य उकसावे की कार्रवाई करती है। हमारे जवानों के अंदर यह इच्छाशक्ति और क्षमता है कि वे ताइवान की रक्षा कर सकें और चीनी विमानों के हमारे हवाई क्षेत्र में घुसपैठ से वे भयभीत नहीं है। हम इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'