HIGHLIGHTS India America 2+2 Talk: टू प्लस टू वार्ता से पहले अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ( Mike Pompeo ) ने अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से मुलाकात की। अमरीकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर ने अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह ( Defence Minister Rajnath Singh ) से हैदराबाद हाउस में मुलाकात की।
नई दिल्ली। भारत और अमरीका ( India America Relation ) के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर दशकों से दोनों पक्षों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं और अब इसी कड़ी में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ( External Affairs Minister Mike Pompeo ) और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर भारत दौरे पर सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे हैं।
भारत और अमरीका के बीच मंगलवार को होने वाले 'टू प्लस टू' मंत्री स्तरीय वार्ता ( 2+2 वार्ता ) में भाग लेने के लिए दोनों नेता यहां पहुंचे हैं। 2+2 वार्ता ( India US 2+2 Dialogue ) से पहले सोमवार को ही नई दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटों बाद माइक पोम्पियो ने विदेस मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। वहीं मार्क एस्पर के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। बैठक में राजनाथ सिंह ने अमरीकी कंपनियों को रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रण दिया है।
दोनों नेताओं के भारत पहुंचने के बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय की ओर से एक नोट जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि अमरीका भारत के बीच ग्लोबल स्तर पर सामिरक संबंधों पर त्रिस्तरीय वार्ता है। इससे पता चलता है कि दोनों ही देश सुरक्षा और राजनयिक मामलों में एक समान सोच रखते हैं।
आज BECA पर होंगे हस्ताक्षर
भारत-अमरीका के बीच आज 2+2 मंत्रीस्तरीय वार्ता होगी। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही महत्वपूर्ण समझौते भी होंगे। मंगलवार को ही दोनों देशों के बीच बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपोरेशन एग्रीमेंट (BECA) पर हस्ताक्षर होंगे।
इस करार के बाद भारत को मिसाइल और ड्रोन्स के बेहतर इस्तेमाल की तकनीक मिलेगी। अमरीका से भारत को मिसाइल और ड्रोन्स के बेहतर इस्तेमाल के लिए जरूरी टोपोग्राफिकल, नॉटिकल और एरोनॉटिकल डाटा मिलेगा।
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ, के.पी. नायर ने कहा कि दोनों देशों के बीच ये कॉन्टिन्यूटी को दिखता है। ये दिखता है कि अमरीका भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में नए राष्ट्रपति के चुने जाने के बाद ये 'टू प्लस टू' मंत्रिस्तरीय वार्ता इस साल होना मुश्किल होता।